जनेश्वर घाट पर पितरों का तर्पण करते लोग
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शुक्रवार से पितृ पक्ष की शुरुआत हो गई है। पितृपक्ष के 15 दिनों तक पितरों का श्राद्ध कर उनका तर्पण किया जाएगा। घर-घर में ब्राह्मणों को भोजन कराकर उनकी प्रिय वस्तु व दक्षिणा का दान दिया जाएगा। 28 सितंबर को पितृ पक्ष का समापन होगा।
पंडित ज्ञानेश शस्त्री ने बताया कि गरुड़ पुराण के अनुसार आश्विन मास, कृष्ण पक्ष के 15 दिन पितृ पक्ष कहलाते हैं। समयानुसार श्राद्ध करने से कुल में कोई दुखी नहीं रहता। पितरों की पूजा करके मनुष्य आयु, पुत्र, यश, स्वर्ग, कीर्ति, पुष्टि, बल, श्री, पशु, सुख और धन-धान्य प्राप्त करता है। देवकार्य से भी पितृकार्य का विशेष महत्व है।
देवताओं से पहले पितरों को प्रसन्न करना अधिक कल्याणकारी है। इसलिए पितरों का तर्पण हर स्थिति में करना चाहिए। मनु के अनुसार जो व्यक्ति नितांत गरीब है वो तिल, जौ, चावलयुक्त जल से तिलांजलि देकर भी पितरों को संतुष्ट कर सकता है। यदि यह भी न हो तो दक्षिण दिशा की ओर मुख कर के श्रद्धा के साथ पितरों का स्मरण करें तो इस से भी पितृ संतुष्ट होते हैं।