न्यायालय में पेश किए पीएफआई के सदस्य (फाइल फोटो)
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बहुचर्चित रहे पीएफआई (पॉपुलस फ्रंट ऑफ इंडिया) सदस्यों के मामले में एसडीएम मांट ने उन पर शांति भंग की धाराओं को नहीं माना है और अभिरक्षा से मुक्त कर दिया है। जानकारी रहे करीब सात माह पूर्व मांट पुलिस ने पीएफआई सदस्यों को पहले शांति भंग में गिरफ्तार किया था। उसके बाद उन्हें अन्य मामले में जेल भेजा था।
एक-एक लाख के मुचलके नहीं भरने पर भेजा था जेल
बता दें कि पिछले वर्ष अक्तूबर माह में पड़ोसी जनपद हाथरस में अनुसूचित जाति की किशोरी की दुष्कर्म के बाद हत्या के मामले ने काफी तूल पकड़ा था। इस दौरान मांट पुलिस ने यमुना एक्सप्रेस वे से पीएफआई के सदस्य अतिकुर्रहमान सिद्दीक सहित चार लोगों को शांति भंग करने के आरोप में गिरफ्तार किया था और 1-1 लाख रुपये के निजी मुचलके दाखिल नहीं करने पर जेल भेज दिया गया था। एसडीएम मांट आरडी राम ने बताया कि सुनवाई के दौरान उन्होंने चारों को अभिरक्षा से मुक्त कर दिया है। वहीं उनके अधिवक्ता मधुवनदत्त चतुर्वेदी ने बताया कि एसडीएम ने सभी चार आरोपियों को अभिरक्षा से मुक्त करने के आदेश जारी किए हैं।
चारों पर हिंसा भड़काने की साजिश रचने का आरोप
चारों आरोपियों पर विदेशी फंडिंग से हिंसा भड़काने की साजिश रचने का आरोप है। चारों मथुरा की जेल में बंद हैं। विदेशी फंडिंग के मामले में इनके साथी रउफ को केरल में गिरफ्तार किया गया था।
यह है हाथरस कांड
हाथरस जिले के चंदपा इलाके में 14 सितंबर 2020 को अनुसूचित जाति की युवती से सामूहिक दुष्कर्म हुआ था। आरोपियों ने उसके साथ हैवानियत की हद पार कर दी थी। गंभीर रूप से घायल पीड़िता को इलाज के लिए दिल्ली के अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां 29 सितंबर को उसकी मौत हो गई थी। हाथरस कांड के विरोध में देशभर में प्रदर्शन हुआ था।
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