उत्तर प्रदेश की विधानसभा में विधायक मनोज पांडेय की सीट के नीचे 12 जुलाई को मिले 150 ग्राम विस्फोटक पेंटा एरिथ्रेटाल टेट्रा नाइट्रेट (पीईटीएन) का पूरा राज आगरा की विधि विज्ञान प्रयोगशाला में खुलेगा। दरअसल, लखनऊ में इसकी प्रारंभिक जांच कराई गई थी। अब सैंपल आगरा भेजे गए हैं। परीक्षण में सात दिन लग सकते हैं।
प्रदेश की विधि विज्ञान प्रयोगशालाओं में विस्फोटक अनुभाग सिर्फ आगरा में है। इसीलिए विधानसभा में मिले पीईटीएन के सैंपल यहां परीक्षण के लिए भेजे गए हैं। प्रयोगशाला के सूत्रों का कहना है कि परीक्षण में दो उप निदेशक के निर्देशन में विस्फोटक अनुभाग के छह वरिष्ठ वैज्ञानिक लगाए गए हैं। लैब के संयुक्त निदेशक डा. अतुल कुमार मित्तल भी परीक्षण की पूरी प्रक्रिया पर बारीकी से नजर रखे हैं।
एंटी टेरिरिस्ट स्क्वैड (एटीएस) और नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) की नजर परीक्षण के परिणाम पर लगी है। विधानसभा में इसके बाद भी सफेद पाउडर मिला था। इसे भी परीक्षण के लिए आगरा भेजा गया है। इसका परीक्षण अभी शुरू नहीं हुआ है। फिलहाल पूरा फोकस पीईटीएन के सैंपल पर है।
इस रिपोर्ट पर जांच की दिशा काफी हद तक निर्भर करेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और गृहमंत्री राजनाथ सिंह का कार्यालय भी रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है। मामले की गंभीरता इससे भी समझी जा सकती है कि संयुक्त निदेशक डा. अतुल कुमार मित्तल ने इसे गोपनीय मामला बताते हुए इस बारे में बात करने से ही साफ इंकार कर दिया है। उधर, लैब सूत्रों का कहना है कि पीईटीएन पाउडर के कुछ सैंपल लखनऊ लैब भी भेजे गए हैं। वहां भी परीक्षण चल रहा है।
ऐसे होगा परीक्षण
petn विस्फोटक
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सबसे पहला परीक्षण यह जानने के लिए होगा कि पाउडर विस्फोटक पदार्थ है या नहीं। अगर विस्फोटक पाया जाता है, यह देखा जाएगा कि यह किस ग्रुप का केमिकल है। इसके बाद परीक्षण करके मालूम किया जाएगा कि यह कौन सा विस्फोटक है।
अधिकारी नहीं चाहते हो कोई भूल
यूपी विधानसभा
आईजी एटीएस असीम अरुण ने बताया कि लखनऊ के महानगर स्थित फारेंसिक साइंस लैब में जो जांच की गई थी वह किट से की गई प्रारंभिक जांच थी, जिसमें पीईटीएन होने की बात कही गई थी। इसकी विस्तृत जांच बेहतर लैब से कराई जा रही है। स्पेक्ट्रोग्राफी और क्रोमेटाग्राफी टेस्ट से ही पाउडर की सही जांच हो सकती है। यह जांच हैदराबाद, आगरा और चंडीगढ़ की लैब में बेहतर हो सकती है।
वहीं फारेंसिक साइंस लैब, लखनऊ के निदेशक श्याम बिहारी उपाध्याय के अनुसार विधान सभा में मिले संदिग्ध पाउडर की जांच लखनऊ में ही मशीनों से की जा रही है। जांच की रिपोर्ट आने में एक सप्ताह का समय लग सकता है। यह कहना गलत है कि लखनऊ में पीईटीएन पाउडर की जांच नहीं हो सकती है।