बटेश्वर मे रानी घाट पर अपने पितरों के तर्पण को जुटी भीड़
बटेश्वर। प्रसिद्ध तीर्थ स्थल बटेश्वर के पवित्र यमुना घाटों पर पितृ पक्ष के पहले दिन शनिवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। जिलेभर के गांव और कस्बों से आए सैकड़ों श्रद्धालुओं ने यमुना में आस्था की डुबकी लगाने के बाद जल, तिल और कुश से अपने पूर्वजों का विधिवत तर्पण किया। उनकी आत्मा की शांति व मोक्ष की कामना की। तीर्थधाम में दिनभर वैदिक मंत्रोच्चार गूंजते रहे। श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा के मद्देनजर घाटों पर पुलिस बल तैनात रहा।
सनातन धर्म में पितृ पक्ष के दौरान पूर्वजों का तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध करने से परिवार में सुख-समृद्धि आती है। पितृ ऋण से मुक्ति मिलती है। पितृ पक्ष 26 सितंबर (शनिवार) से शुरू हो गए। 10 अक्तूबर (सर्व पितृ अमावस्या) तक तर्पण और श्राद्ध की परंपरा का निवर्हन किया जाएगा। 30 सितंबर को तिथि क्षय के कारण चतुर्थी व पंचमी दोनों का श्राद्ध एक साथ होगा। तर्पण के समय दक्षिण दिशा की ओर मुख कर जल अर्पित किया जाता है। पंचबलि (गाय, कुत्ता, कौआ, देव, चींटी) निकालकर ब्राह्मणों को भोजन कराया जाता है। इस दौरान सात्विक आचरण रखा जाता है। शुभ व मांगलिक कार्य वर्जित रहते हैं।
फतेहपुर सीकरी में पितृ दिवस के अवसर पर शनिवार को दूरा में आर्य समाज की ओर से ओम वाटिका मैरिज होम में हवन-यज्ञ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में आर्य समाज से जुड़े महिला-पुरुषों एवं बुजुर्गों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ आहुतियां देकर परिवार एवं समाज की सुख-शांति की कामना की। कन्हैया आर्य ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हवन-यज्ञ संपन्न कराया। इस दाैरान प्रधान रूपकिशोर, विपिन अग्रवाल, सोहनलाल गर्ग, हरेश वैद्य, लखमी चंद, तारा राजपूत, ओमप्रकाश आर्य, दर्याव सिंह, रमेश आर्य आदि उपस्थित रहे।