18 से कम की उम्र यानि किशोरावस्था में पांच फीसदी किशोरों में मधुमेह निकला। वहीं 35 की उम्र में ऐसी पांच बीमारियों का खतरा बताया गया, जिनसे सजग रहने की जरूरत है।
रिसर्च सोसाइटी फाॅर स्टडी ऑफ डायबिटीज इन इंडिया के शोध ने चिंता बढ़ा दी है। इसकी स्टडी के अनुसार 70 फीसदी बच्चे-किशोरों में मोटापा मिला, जिनमें पांच फीसदी मधुमेह पीड़ित निकले। इनमें 35 की उम्र पर पांच बीमारियों का खतरा है। फतेहाबाद रोड स्थित होटल में दोदिवसीय यूपीकाॅन-2025 के अंतिम दिन चिकित्सकों ने इस बीमारी से बचाव के लिए भारतीय जीवनशैली और खानपान पर जोर दिया है।
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सोसाइटी के सदस्य प्रयागराज के डाॅ. सुबोध जैन ने कहा कि 15-70 साल के 282 लोगाें के अध्ययन में पांच फीसदी में मधुमेह मिली। इन लोगों की उम्र 15-20 साल तक रही। इनमें 85 फीसदी संपन्न परिवार के थे। इनमें 70 फीसदी मोटे थे। पूरे दिन में खेलकूद घंटेभर भी नहीं था, स्क्रीन टाइम औसतन 3-5 घंटे था। हरी सब्जी, दाल, फल-सलाद के बजाय फास्ट फूड अधिक खाते थे। उन्होंने बताया कि इनमें जब रिस्क फेक्टर का आंकलन किया तो अगले 15-20 साल में हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, आंख की रोशनी कम होना, नसाें की बीमारी और कोलेस्ट्रॉल होने का खतरा 35 फीसदी अधिक पाया गया।
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समापन पर मुख्य अतिथि एसएन मेडिकल काॅलेज के प्राचार्य डाॅ. प्रशांत गुप्ता ने सभी को प्रमाणपत्र देकर पुरस्कृत किया। आयोजन अध्यक्ष डाॅ. अतुल कुलश्रेष्ठ, आयोजन सचिव डाॅ. प्रभात अग्रवाल, डाॅ. आशीष गाैतम, डाॅ. अजित चाहर, डाॅ. सूर्यकमल वर्मा, डाॅ. निखिल पुरुषनानी, डाॅ. योगेश गोयल आदि माैजूद रहे।
तनाव और अधूरी नींद से समस्या
एसोसिएशन ऑफ फिजीशियन ऑफ इंडिया सहारनपुर के निर्वाचित अध्यक्ष डाॅ. प्रवीण कुमार चावला ने बताया कि मधुमेह के लिए तनाव, अधूरी नींद, पौष्टिक भोजन से दूरी और शारीरिक परिश्रम न करना मुख्य वजह हैं। 10-15 साल के मुकाबले अब डेढ़ गुना मरीज अधिक मिल रहे हैं। सबसे बड़ी चिंता की बात है कि मधुमेह से पूरा शरीर प्रभावित हो रहा है। बाल झड़ने, मांसपेशियों कमजोर होने के साथ याैन क्षमता भी प्रभावित हो रही है। बच्चों में टाइप-वन मिलने की दर भी 20-25 फीसदी अधिक है। इससे बचाव के लिए भारतीय शैली को अपनाना होगा। बच्चों और किशोरों में बढ़ती बीमारी को देखते ही संस्था ने स्कूल-काॅलेज स्तर पर जागरूकता पर जोर दिया है।
मरीजों को सलाह वजन कम करें
गणेश शंकर विद्यार्थी मेमोरियल मेडिकल काॅलेज के मेडिसिन विभागाध्यक्ष डाॅ. एसके गाैतम ने बताया कि मधुमेह के लिए मोटापा-तनाव सबसे बड़े कारक हैं। इसे नियंत्रित रखना भी मरीजों के लिए चुनाैती बना हुआ है। मरीज अपना वजन 14-15 किलो कम कर लेते हैं तो दवा पर निर्भरता नहीं रहेगी। कई ऐसे भी मरीज हैं जो देसी उपाय करते हैं, इससे मर्ज ठीक नहीं होगा। इलाज भी जरूरी है।
ये करना चाहिए:
- तेज गति से रोजाना 30 मिनट तक टहलें। सप्ताह में 150 घंटे।
- छोटी दूरी के लिए पैदल चलने या फिर साइकिल का उपयोग करें।
- पैरों में दिक्कत नहीं है तो लिफ्ट के बजाय सीढ़ी से जाएं।
- फास्ट-जंक फूड की लत न लगाएं। तले भोजन से बचें।
- स्कूलों में शारीरिक व्यायाम पर जोर, फास्ट फूड प्रतिबंध हो।
-भोजन में मोटा अनाज, दाल, हरी सब्जी, फल-सलाद बढ़ाएं।