वृंदावन में भगवान के दर्शन करने के लिए हर दिन हजारों श्रद्धालु आते हैं, लेकिन बंदर यहां आने वाले श्रद्धालुओं का सिर दर्द बने हुए हैं। ये बंदर किसी का चश्मा, किसी की टोपी तो किसी का बैग छीनकर फरार हो जाते हैं। बंदरों के आतंक से श्रद्धालु ही नहीं स्थानीय लोग भी परेशान हैं।
मथुरा के वृंदावन की यातायात व्यवस्था को बिगाड़ने का सबसे बड़ा कारण बने ई-रिक्शा एवं आम जन की समस्या बंदरों के उत्पात को लेकर प्रशासनिक ढिलाई के खिलाफ नगरवासी लामबंद हो रहे हैं। नगर के व्यापारिक, राजनीतिक, स्वयंसेवी संगठनों के कार्यकर्ता और पंडा समाज के लोग मंगलवार को सड़क पर उतर आए।
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लोगों ने पैदल मार्च निकाल कर नगर निगम कार्यालय और कोतवाली पर हंगामा किया। नगर निगम चौराहे पर विरोध-प्रदर्शन कर जाम लगा दिया। लोगों ने नगर निगम के अधिकारियों और पुलिस से वार्ता की लेकिन दोनों की समस्याओं का समाधान नहीं निकल सका है।
रालोद नेता योगेश द्विवेदी ने कहा कि जल्द समस्याओं का निदान नहीं हुआ तो बंदरों के कारण लोग वृंदावन आने में डरने लगेंगे। बंदर आए दिन स्थानीय लोगों के अलावा दूरदराज से आने वाले श्रद्धालु, महिला, बुजुर्ग, बच्चों पर जानलेवा हमला करते हैं।
कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष सोहन सिंह सिसौदिया ने कहा कि नगर की सड़कों के साथ-साथ गली-गली में ई-रिक्शा चालकों ने आतंक मचा रखा है। छोटे-छोटे बच्चे ई-रिक्शा चलाते हुए देखे जा सकते हैं। शिकायतों के बावजूद पुलिस कोई कार्रवाई नहीं करती। ब्राह्मण सेवा संघ के अध्यक्ष चंद्रलाल शर्मा ने कहा कि दोनों मुख्य समस्या वृंदावन वासियों के लिए परेशानी का कारण है।
पंडा सभा के अध्यक्ष श्याम सुंदर गौतम ने कहा कि बंदरों और ई-रिक्शा चालकों के आतंक से वृंदावन में हाल बेहाल हो गए है। दो दिन पूर्व मासूम बच्चे की टिर्री की टक्कर से मौत हो गई। सुधीर शुक्ला, धनेंद्र अग्रवाल, आलोक बंसल, शत्रुघन शर्मा, मेघश्याम गौतम ने कहा कि नगर में ई-रिक्शा और बंदरों से क्षेत्र वासी काफी परेशान हैं।
कोतवाली प्रभारी सूरज प्रकाश शर्मा ने कहा कि वृंदावन में दौड़ रहे ई-रिक्शा को किस नियम के अनुसार बंद कराएं। ई-रिक्शा को रोकने का काम नगर निगम का है, पुलिस का नहीं।