पानी की एक एक बूंद कीमती है। इसे बचाने के लिए शहर के पर्यावरण, जल संरक्षण, सामाजिक संगठन और स्कूली बच्चे जब एक साथ अमर उजाला के ट्री आफ लाइफ कार्यक्रम में आयोजित संवाद में जुटे तो अपने अपने तरीकों से पानी की बूंद बूंद बचाने का संकल्प लेकर ही लौटे।
विश्व जल सप्ताह के दौरान आयोजित कार्यक्रम में तय हुआ कि घर हो या दफ्तर, सड़क हो या बाजार, जहां भी पानी की फिजूलखर्ची करते लोग दिखेंगे, उन्हें जागरूक करेंगे और जल संरक्षण के लिए प्रेरित करेंगे। सबसे पहले खुद पानी बचाने में जुटेंगे। उनके इस संकल्प पर सभी को तुलसी का पौधा भेंट किया गया।
इस तरह बचाएंगे पानी
- मग में पानी लेकर ब्रश करेंगे, नल से नहीं
- बाल्टी में पानी लेकर नहाएंगे, शॉवर से नहीं
- घर की छत का पानी हार्वेस्टिंग कर बचाएंगे
- वाटरवर्क्स से पानी लेंगे, सबमर्सिबल से नहीं
- पोखर, तालाबों को गहरा कराकर बचाएंगे पानी
- सप्ताह में एक बार साबुन लगाकर नहाएंगे
भवनों में लगवा रहे रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम
डीएफओ मनीष मित्तल ने कहा कि वन विभाग की सभी चौकियों, इमारतों पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग लगवा रहे हैं। पौधरोपण में 3×3 फुट की जगह कम दूरी रखने का प्रस्ताव है। वनभूमि में ककरैठा जैसे आर्द्र क्षेत्रों के लिए लगातार काम हो रहा है।
नगर निगम के पर्यावरण अभियंता राजीव कुमार राठी ने कहा कि अपने घर और सोसायटी में वॉश बेसिन का पानी पाइप से जुड़वा कर फ्लश करने में उपयोग कर रहे हैं। जो लोग बारिश का पानी बचा रहे हैं, वो सीधे बोरिंग में पानी न डालें, बल्कि फिल्टर करके पिट के जरिए बचाएं।
99 लाख लीटर पानी जमीन के अंदर
नगर निगम के पर्यावरण अभियंता राजीव कुमार राठी ने बताया कि नगर निगम की 6 इमारतों से 99 लाख लीटर पानी रेन वाटर हार्वेस्टिंग से जमीन में डाला जा रहा है। 11 पार्कों में 95 लाख लीटर पानी हार्वेस्टिंग के जरिए सहेजा जाएगा।
11 तालाबों की सफाई और पानी सहेजने की क्षमता बढ़ाने से 17 करोड़ लीटर पानी बचेगा, वहीं टेढ़ी बगिया, ताजगंज, लंगड़े की चौकी में 7 टैंक के जरिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग को बचाने का प्रोजेक्ट चल रहा है। हर 6 घरों के बारिश के पानी को भूगर्भ में डालने का काम जारी है।