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दिनभर हो रहीं कोरोना की बातें, लोगों के दिलो-दिमाग में बैठा डर, बढ़ रहे डिप्रेशन के मामले

Fri, 27 Mar 2020 02:17 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा

सार

आगरा में बीते 50 दिनों से ऐसे मामले अधिक बढ़े हैं। जनता कर्फ्यू और लॉकडाउन होने के बाद घरों में अधिकांश समय वायरस पर ही चर्चा की जा रही है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
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विस्तार
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सोशल मीडिया, टीवी, अखबार में कोरोना वायरस की खबरें और समय बचा तो घर में भी इसकी ही बातें। पूरेदिन में 10-12 घंटे में कोरोना की चर्चा से लोग भयभीत हैं। इससे डिप्रेशन के मरीजों की परेशानी तो बढ़ी ही है,सामान्य लोगों में भी इसका खतरा है। आगरा के चिकित्सक बताते हैं कि फोन पर ऐसे लोगों की काउंसलिंग की जा रही है। 
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केस : एक
आगरा के दयालबाग निवासी 25 साल के युवक को चीन से आए उसके दोस्त ने गले से लगा लिया। इसके दो दिन बाद उसे खांसी हुई तो वो भयभीत हो गया। कोरोना वायरस से संक्रमण का डर सताने लगा, दो-तीन दिन तक गुमसुम रहने लगा। परिजनों ने पूछने पर बात बताई तो उसके दोस्त से फोन करके पूछा। 

उसने बताया कि वो जनवरी में आया था, उसे कोई संक्रमण नहीं है। इस पर भी वह नहीं माना, डॉक्टर को दिखाया, पड़ताल में सामान्य फ्लू था। दवा के बाद वह तीन दिन में ठीक हो गया। परिजनों ने बताया कि इन पांच-छह दिनों में खाना-पीना तक कम कर दिया था।
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केस स्टडी दो

यमुनापार के इंजीनियरिंग कॉलेज में नौकरी करने वाले युवक का पड़ोसी विदेश यात्रा से लौटा। युवक ने उससे हालचाल लिए। पड़ोसी के घर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने आकर चेक किया था। इसकी जानकारी पर युवक आशंकित हो गया। सोशल मीडिया की भ्रामक जानकारी पढ़ी तो चिंता और बढ़ गई। 

परिजनों से भी दूरी बनाकर कमरे में बंद हो गया। परिजनों के काफी समझाने के बाद असर नहीं हुआ तो फोन परडॉक्टर को लक्षण बताए, उन्होंने इसे सामान्य बताकर एहतियात बरतने को कहा। मानसिक रोग विशेषज्ञों सेकाउंसलिंग भी कराई। अब वह सामान्य है।

बीते 50 दिनों से ऐसे मामले 

शहर में बीते 50 दिनों से ऐसे मामले अधिक बढ़े हैं। जनता कर्फ्यू और लॉकडाउन होने के बाद घरों में अधिकांशसमय वायरस पर ही चर्चा की जा रही है। सोशल मीडिया और अखबार भी इसी से भरा पड़ा है। डिप्रेशन में लोग मनोचिकित्सकों से संपर्क कर रहे हैं। 

मानसिक स्वास्थ्य संस्थान के डॉ. दिनेश राठौर ने बताया कि लगातार बातें और चर्चा होने से लोगों के दिमाग में अनहोनी की आशंका होने लगती है। कई ऐसे लोग भी हैं जो चर्चा खूब कर रहे, लेकिन वायरस से बचने के लिए उतने जागरूक नहीं हैं।
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काउंसलिंग करें ऐसे लोगों की

वरिष्ठ मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ केसी गुरनानी ने बताया कि इस समय लोग घरों पर हैं और अन्य सारे कार्य भी बंद हैं। अधिकांश समय कोरोना वायरस से जुड़ी बातें और खबरें ही सुनने-पढ़ने को मिल रही हैं। सबसे ज्यादा भ्रामक जानकारियों से चिंतित हो रहे हैं। इससे डिप्रेशन का खतरा बढ़ गया है। पुराने मरीजों का मर्ज बढ़ गई है, फोन पर उनकी काउंसलिंग कर रहे हैं। परिजन भी काउंसलिंग करें।

हर मरीज कोरोना के बारे में पूछ रहा

वरिष्ठ मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ यूसी गर्ग ने बताया कि फोन पर पुराने मरीज कोरोना वायरस से अनहोनी कीआशंका जता रहे हैं, कहीं उन्हें कोरोना तो नहीं हो जाएगा, कुछ ने तो खुद को कमरे में बंद कर लिया है। कई ऐसे मरीज भी हैं जो जरूरत से ज्यादा सावधानी बरत रहे हैं और बच्चों-परिजनों से भी दूरी बना रहे हैं, जबकि वह कहीं बाहर नहीं गए और बाहरी लोगों से मिले भी नहीं हैं।
 
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