दो साल तक अवैध रूप से कब्जाधारियों के चंगुल में मथुरा के जवाहर बाग को लेकर जिला प्रशासन अब सतर्क हो गया है। शुक्रवार को जवाहर बाग के कब्जामुक्त होने की बरसी पर वहां हवन पूजन करने पहुंचे लोगों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया।
बता दें कि बीते साल 2 जून 2016 को पुलिस और अवैध कब्जाधारियों की बीच संघर्ष के बाद जवाहर बाग को मुक्त कराया जा सका था। मार्च 2014 में धरना प्रदर्शन के नाम पर जवाहर बाग में घुसा रामवृक्ष यादव स्वाधीन भारत विधिक सत्याग्रह के बैनर तले अपने हजारों लोगों के साथ यहां डेरा डाले था।
पुलिस और कब्जाधारियों के बीच हुए संघर्ष में 29 लोगों की मौत हो गई थी। इसमें मथुरा पुलिस के दो जांबाज अफसर एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी और एसओ संतोष कुमार शहीद हो गए थे। ऐसे में जवाहर बाग के कब्जामुक्त होने के बाद मथुरा जिला प्रशासन ने इसे सामाजिक आयोजनों से दूर रखा है। हालांकि लोग यहां घूमने जा सकते हैं।
शुक्रवार को मथुरा के रालोद नेता ताराचंद्र गोस्वामी अपने 10-12 साथियों के साथ यहां हवन करने पहुंच गए। इसकी जानकारी मिलते ही जिले के अफसरों में खलबली मच गई। ये सभी लोग यहां एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी और एसओ संतोष कुमार की स्मृति में हवन कर रहे थे। सिटी मजिस्ट्रेट और एसपी सिटी के साथ मौके पर पहुंचे पुलिस बल ने हवन कर रहे लोगों को हिरासत में ले लिया। प्रशासन ने जवाहर बाग को नो एंट्री जोन घोषित कर दिया है।