बाह-बटेश्वर में क्या है खास
- आगरा और इटावा जिला मुख्यालय से 75 और 60 किमी दूर मध्य प्रदेश, राजस्थान, फिरोजाबाद, इटावा के मध्य बसा बाह अब तक पिछड़ेपन का दंश झेल रहा है।
- बटेश्वर तीर्थ स्थल, जैन तीर्थ स्थल , चंबल सेंचुरी दुनिया भर में प्रसिद्ध है।
- बाह के जरार स्थित गल्ला मंडी में राजस्थान मध्यप्रदेश तक के कारोबारी पहुंचते थे, जो अब उजड़ी पड़ी है।
- अटल जी की पैतृक भूमि बटेश्वर वीरान पड़ी है।
- बटेश्वर का उत्तर भारत का प्रमुख मेला क्षेत्रीय दायरे में सिमटता जा रहा है।
- यहां की आबादी को न्याय पाने के लिए 75-100 किमी तक की दौड़ लगानी पड़ती है।
- औद्योगिक विकास से बाह क्षेत्र अछूता है।
- कृषि क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए संसाधन और तकनीक नहीं मिल पा रही।
- इलाज के लिए अच्छे अस्पताल का अभाव है।
- पौराणिक स्थल, किले और हवेलियां पर्यटन विकास से अछूती हैं।
बाबा हर नारायण यादव ने कहा कि बाह के पिछड़ेपन के कलंक को मिटाने और जनता तक मूलभूत सुविधा पहुंचने के लिए जिले की मांग जायज है। मनोज दीक्षित ने कहा कि बाह को विकास की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए इसे जिला बनाया जाना चाहिए। उपेक्षा सहन नहीं होगी।
बाह निवासी राजेश यादव ने कहा कि जन आंदोलन की अनदेखी सरकार को भारी पडे़गी। जिला बनने पर लोगों को न्याय के लिए नहीं भटकना पडे़गा। रामसिंह आजाद ने कहा कि बटेश्वर की विरासत के विकास और मेले के अस्तित्व के लिए जिला बनाया जाना जरूरी है।
राकेश वाजपेयी ने कहा कि अटल जी ने दुनिया में देश का मान बढ़ाया है। उनकी पहचान से जिला बनने से बटेश्वर का विकास होगा। स्थानीय निवासी अमित ओझा ने कहा कि अटल की स्मृति में जिला बनने से बाह का चहुमुखी विकास होगा। क्षेत्र में संसाधन बढेंगे।
इस बार भी अधूरी रह गई बटेश्वर के जिला बनने की ख्वाहिश
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती पर हर कोई बाह-बटेश्वर को जिला बनाए जाने की उम्मीद लगाए बैठा था। देश के लिए लंबी कूद के 40 अंतरराष्ट्रीय पदक जीत चुके ओलंपियन अंकित शर्मा ने अपनी बटेश्वर के घाट की तस्वीर फेसबुक पर पोस्ट करते हुए लिखा है कि इस बार भी बटेश्वर के जिला बनने की ख्वाहिश अधूरी रह गई।