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Agra News: जागरूक हुए लोग, कम हुआ बेटा-बेटी में भेदभाव

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मैनपुरी। समय के साथ लोग जागरूक हो रहे हैं। अब बेटा और बेटी में भेदभाव भी काफी कम हुआ है। यही कारण है कि बेटियां हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। शिक्षा से लेकर खेल तक में जिले की बेटियां नाम रोशन कर रही हैं।
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एक समय था जब बेटियों को लोग बेटों से कम आंकते थे और बेटी को बोझ समझते थे। समय के साथ लोगों की सोच बदल गई है। अब लाेग बेटियों को बोझ नहीं समझते हैं। बेटियां भी माता-पिता की उम्मीदों पर खरा उतर रही हैं। यही कारण है कि शिक्षा से लेकर खेल तक बेटियां आगे आकर माता-पिता का नाम रोशन कर रही हैं।
बेटे-बेटी में फर्क न करने से लिंगानुपात में भी काफी सुधार हुआ है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2020 में जिले में 21113 बालक तो 19974 बालिकाओं का जन्म हुआ। वहीं 2021 में 23897 बालक और 21874 बालिकाओं ने जन्म लिया। 2022 में 25084 बेटे और 23074 बेटियां पैदा हुईं और 2023 में 23525 बालकों पर 21218 बालिकाओं ने जन्म लिया। धीरे-धीरे बालक-बालिकाओं के लिंगानुपात का अंतर कम हो रहा है।
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बेटियों को पढ़ाकर अधिकारी बनाना चाहते हैं शुभम
गांव लालपुर निवासी शुभम के दो बेटियां हैं। बड़ी बेटी अविका 14 साल की है तो छोटी बेटी मलिका पांच साल की है। शुभम का कहना है कि उनका मकसद बेटियों को पढ़ा लिखाकर अच्छे पद पर पहुंचाना है। उनका कहना है कि बेटा और बेटी में कोई अंतर नहीं होता है। हमारी बेटियां किसी से पीछे नहीं हैं।
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बेटियां जमीन से लेकर आसमान तक भर रहीं उड़ान
शहर के व्यवसायी मनीष तापड़िया के एक पुत्री है, जिसका नाम उन्होंने मेघना रखा है। मेघना वर्तमान में सीए की पढ़ाई कर रही हैं। उनका कहना है कि आज बेटियां किसी से पीछे नहीं हैं। बेटियां जमीन से लेकर आसमान तक देश का नाम रोशन कर रही हैं। उनकी बेटी भी बेहतर पढ़ाई कर अपने पिता का नाम रोशन कर रही है।
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