ईदगाह-खेरिया आरओबी बंद होने के बाद रास्ते के शॉर्टकट के लिए लोग जान जोखिम में डालकर रेलवे ट्रैक (मौत की पटरी) पार कर रहे हैं। सामने से गुजरती ट्रेन और पटरी पर आवाजाही के बीच सुरक्षा के इंतजाम नाकाफी हैं। आगरा रेल मंडल में 1 जनवरी से 21 अक्तूबर तक ट्रैक पार करने की जल्दीबाजी में 214 लोगों की जान जा चुकी है। इसके बावजूद ईदगाह-खेरिया आरओबी के नीचे से लोग ट्रैक बेखौफ पार कर रहे हैं।
आरओबी के नवनिर्माण की वजह से 17 अक्तूबर को दोनों ओर दीवार और टिनशेड लगाकर रास्ता बंद कर दिया गया है। इसके बाद लोग शॉर्टकट के लिए रेल ट्रैक पार कर ईदगाह चौराहे की ओर जा रहे हैं। शनिवार को भी एक व्यक्ति सामने से ट्रेन गुजरने के दौरान जुगाड़ की टिर्री पर सामान लादकर ट्रैक पार करता दिखाई दिया। जिम्मेदारों की ओर से न तो कोई रोकथाम के उपाय किए गए हैं और न ही चालान की प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। आरओबी बंद होने के दिन आरपीएफ पहुंची थी लेकिन इसके बाद नियमित निगरानी नजर नहीं आई।
1 जनवरी से 21 अक्तूबर तक आगरा कैंट में 37, आगरा फोर्ट में 12, मथुरा जंक्शन में 143, कासगंज जंक्शन में 15, हाथरस सिटी में पांच और एटा में दो मौत के मामलों में जीआरपी ने कार्रवाई की है। नियमानुसार अनधिकृत रूप से ट्रैक पार करने पर रेलवे एक्ट की धारा 147 के तहत दंडनीय अपराध है। इसमें छह महीने तक की सजा और एक हजार रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है।
अनधिकृत ट्रैक पार करने से रोकने के लिए आरपीएफ तैनात है। अगर लोग ईदगाह-खेरिया आरओबी के नीचे से ट्रैक पार कर निकल रहे हैं तो मामले में आरपीएफ कमांडेंट के संज्ञान में लाकर कार्रवाई कराई जाएगी। लोगों को निर्धारित वैकल्पिक रास्ते का इस्तेमाल करना चाहिए।
-संजय कुमार गौतम, जनसंपर्क अधिकारी, आगरा रेल मंडल