रसोई गैस सिलिंडर की बुकिंग और सप्लाई का गणित गड़बड़ा गया है। सिस्टम की खामियों और गैस कंपनियों की सुस्ती का खामियाजा शहर की गृहिणियों को भुगतना पड़ रहा है। हालात ये हैं कि बुकिंग के बाद 66 हजार सिलिंडर उपभोक्ताओं के घर तक नहीं पहुंचे और कागजों से गायब हो गए हैं। कोई सात दिन तो कोई 15 दिन से गैस एजेंसियों के चक्कर काट रहा है।
जिले में इंडेन, भारत पेट्रोलियम (बीपी) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (एचपी) के करीब 12.50 लाख उपभोक्ता हैं। नियम के मुताबिक, बुकिंग के 24 घंटे के भीतर सिलिंडर की डिलीवरी घर पर हो जानी चाहिए, लेकिन वर्तमान में यह व्यवस्था ध्वस्त है। उपभोक्ताओं को अब एक रिफिल के लिए 7 से 15 दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है। गैस कंपनियों की इस लेट-लतीफी ने आम आदमी की रसोई का बजट और समय दोनों बिगाड़ दिया है।
जिला पूर्ति विभाग की 13 मार्च, 2026 से 18 अप्रैल, 2026 तक की बुकिंग और सप्लाई की ताजा रिपोर्ट में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। इस दौरान कुल बुकिंग 8,79,310 लगभग 8.79 लाख हुई। जबकि बुकिंग के सापेक्ष कुल बिक्री (डिलीवरी) 8,13,561 (लगभग 8.13 लाख) हो सकी है। ऐसे में 65,749 सिलिंडर का डिलीवरी बैकलॉग में अटक गई है। करीब 66 हजार सिलिंडरों का यह अंतर ही गैस संकट की मुख्य वजह है, जिसने हजारों उपभोक्ताओं को परेशान कर रखा है।
सर्वर डाउन रहने की समस्या
रिपोर्ट के अनुसार 13 मार्च से 31 मार्च के बीच लगातार सर्वर डाउन रहने की समस्या रही। तकनीकी खराबी के कारण बुकिंग तो होती रही, लेकिन एजेंसियों के पास डिलीवरी का डाटा अपडेट नहीं हो सका। दूसरी तरफ बुकिंग अंतराल बढ़कर 45 दिन तक हो गया। जिले के 89 गैस डिस्ट्रीब्यूटर्स के पास स्टॉक भी कम पहुंच रहा है। गैस कंपनियों की मनमानी से डिस्ट्रीब्यूटर्स और उपभोक्ता दोनों प्रभावित हैं
तकनीकी खामियों से हुई देरी
सर्वर की समस्या खत्म हो गई है। कंपनियों के स्तर पर तकनीकी खामियों के कारण डिलीवरी में देरी हुई है। लंबित बुकिंग को जल्द निपटाने के निर्देश दिए गए हैं ताकि उपभोक्ताओं को राहत मिल सके।
- आनंद कुमार, जिला पूर्ति अधिकारी
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