मैनपुरी। किशोर अपराधियों को अदालत के लंबे समय तक चक्कर नहीं काटने होंगे। किशोर न्यायालय में लंबित मुकदमों का शीघ्र निस्तारण किया जाएगा। मुकदमा लटकाने की प्रवृति पर रोक लगाने के लिए स्थगन प्रार्थनापत्रों को विशेष परिस्थितियों में ही स्वीकार किया जाएगा।
किशोर अपराधियों के मामलों की सुनवाई किशोर न्यायालय में की जाती है। उनके मुकदमों का निस्तारण करने के लिए निर्धारित की गई तिथियों पर सुनवाई की जाती है। मुकदमों को लंबित करने के लिए आम तौर पर बिना किसी ठोस कारण के स्थगन प्रार्थना पत्र देकर मुकदमों को लटकाने की प्रवृति बढ़ती जा रही है। जिससे आरोपी बनाए गए किशोरों को अदालतों केे लंबे समय तक चक्कर काटने पड़ते हैेंं। हाईकोर्ट के निर्देश के पालन में अब चार्जशीट दाखिल होने के बाद बिना किसी ठोस कारण के मुकदमों की सुनवाई में तारीख बढ़वाने के लिए स्थगन प्रार्थना पत्र स्वीकार नहीं किए जाएंगे। मुकदमों की निर्धारित तिथियों पर सुनवाई करके उनका शीघ्र निस्तारण करके किशोर अपराधियों को न्याय दिलाया जाएगा।
146 मुकदमे हैं विचाराधीन
किशोर न्यायालय में 146 मुकदमे विचाराधीन हैं। जिनमें से कुछ मामले गंभीर अपराधों के भी हैं। हत्या और दुष्कर्म जैसे मामलों में भी किशोर अपराधी के पैरोकार मुकदमों को लटकाने के लिए स्थगन प्रार्थना पत्र देते हैं। अब उनको बिना किसी ठोस कारण के स्वीकार नहीं किया जाएगा।
मुकदमा लंबित करने की प्रवृति से शीघ्र न्याय की मंशा पूरी नहीं हो पाती है। जिससे किशोर अपराधियों को भी अदालतों केे चक्कर लगाने पड़ते हैं। नई व्यवस्था से लाभ होगा।
संतोष यादव, सचिव बार एसोसिएशन
मुकदमा लंबे समय तक लंबित रहने से सर्वोच्च न्यायालय की वह मंशा पूरी नहीं होती जिसमें वादकारी का हित सर्वोच्च माना गया है। नई व्यवस्था लाभकारी होगी।
चतुर सिंह, पूर्व डीजीसी फौजदारी