ताजमहल को आसमां से देखने की चाहत में 25 से 30 नवंबर तक ताजनगरी में ताज बैलून फेस्टिवल किया गया लेकिन गर्म हवा के इन गुब्बारों की उड़ान के नाम पर बड़ा ‘खेल’ किया गया है। यूपी टूरिज्म ने उड़ान भरने वाले हर व्यक्ति के लिए बैलून सफारी कंपनी स्काई वाल्ट्ज को आठ गुना ज्यादा कीमत का भुगतान किया जाएगा। दो करोड़ रुपये में शहर के 200 लोगों ने ही उड़ान भरी, जबकि स्काई वाल्ट्ज 12 हजार रुपये प्रति व्यक्ति का चार्ज जयपुर में एक घंटे की उड़ान के लिए वसूलती है।
ताज बैलून फेस्टिवल का दूसरा संस्क रण 25 से 30 नवंबर तक आगरा के पीएसी मैदान में चला। छह दिनों में पांच दिन ही उड़ान हो पाई, जबकि एक दिन कोहरे के कारण इसे कैंसल करना पड़ा। हर दिन 15 बैलून की जगह 8-9 बैलून ही उड़ पाए और 30-35 लोग ही बैलून राइड के रोमांच को महसूस कर पाए। इनमें प्रशासन के अधिकारी और उनके परिवार के लोग भी शामिल रहे।
करीब 200 लोगों की बैलून उड़ान के लिए यूपी टूरिज्म ने दो करोड़ रुपये का टेंडर किया। बैलून सफारी चलाने वाली कंपनी स्काई वाल्ट्ज को उसकी प्रति व्यक्ति उड़ान की फीस 12 हजार रुपये से करीब आठ गुना ज्यादा का भुगतान इस फेस्टिवल में किया जाएगा। यानी करीब एक लाख रुपये प्रति व्यक्ति के हिसाब से कंपनी को भुगतान किया जाएगा।
बीते साल पांच दिनों के फेस्टिवल के लिए कंपनी को 1.50 करोड़ का भुगतान यूपी टूरिज्म ने किया था। तब पांच दिनों में 325 से ज्यादा लोगों ने उड़ान भरी थी। हैरतअंगेज पहलू ये है कि यूपी टूरिज्म की इस फेस्टिवल में दी गई शर्तों में से अधिकांश का पालन भी स्काई वाल्ट्ज ने नहीं किया है।
‘छह दिनों के फेस्टिवल के लिए दो करोड़ रुपये का टेंडर किया गया था। फेस्टिवल को बहुत प्रचार मिला है। कितने लोग कम उड़े, इससे फर्क नहीं पड़ता। लोगों ने इसका आनंद लिया। मौसम भी खराब था, जिससे कम लोग उड़ान भर पाए।’
अविनाश मिश्रा, संयुक्त निदेशक पर्यटन
क्यों नहीं बढ़ाए बैलून फेस्टिवल के दिन
स्काई वाल्ट्ज जयपुर में 60 मिनट यानी एक घंटे की बैलून राइड के लिए विदेशी पर्यटकों से 250 अमेरिकी डॉलर और भारतीय पर्यटकों से 12 हजार रुपये की फीस लेती है। इसमें सुबह का नाश्ता और चाय-काफी भी शामिल है। आगरा में पांच दिनों में कंपनी ने 15 बैलून प्रति दिन उड़ाने का दावा किया था लेकिन खराब मौसम से 8-9 बैलून ही उड़ान भर पाए। इनमें भी सरकारी अधिकारी और उनके सिफारिशी स्थानीय उद्योगपति ही उड़ान का लुत्फ ले पाए। ऐसे में प्रशासन चाहता था कि फेस्टिवल के दिन बढ़ा सकता था ताकि और लोग बैलून से उड़ान भर पाते लेकिन ऐसा नहीं किया गया।