मैनपुरी में जिला अस्पताल की इमरजेंसी में रविवार को मरीज तड़पते रहे और डॉक्टर साहब आराम फरमाते रहे। उन्होंने रेस्ट रूम से निकलकर मरीज को देखा तक नहीं। यहां तैनात स्टाफ ने उपचार देने की कोशिश की, लेकिन सुधार नहीं हुआ तो डॉक्टर साहब ने रेस्ट में बैठे-बैठे ही मरीजों को रेफर कर दिया।
उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले के जिला अस्पताल का स्थिति खराब है। यहां इमरजेंसी की सेवाएं बद से बदतर होती जा रही हैं। कई बार डॉक्टर के देरी से पहुंचने पर तीमारदारों और स्टॉफ के बीच कहासुनी और मारपीट भी हो चुकी है। लेकिन, इसके बाद भी व्यवस्था सुधरते नजर नहीं आ रही है।
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रविवार को भी जिला अस्पताल की इमरजेंसी का कुछ ऐसा ही हाल नजर आया। यहां रविवार की सुबह आठ बजे से दो बजे के बीच ईएमओ (इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर) डॉ. प्रताप सिंह की ड्यूटी रही। वह इमरजेंसी की बजाय रेस्ट रूम पर ही बैठे रहे। वहीं से बिना मरीज को देखे हुए उन्हें रेफर स्लिप पर हस्ताक्षर कर उसे रेफर करा दिया।
केस-एक
थाना भोगांव क्षेत्र के आलीपुरखेड़ा गांव निवासी 45 वर्षीय हेमराज को उल्टी में खून आ रहा था। परिजन गंभीर हालत में 108 एंबुलेंस की सहायता से उसे लेकर जिला अस्पताल की इमरजेंसी पहुंचे। यहां फॉर्मासिस्ट उदय प्रताप सिंह स्टाफ के साथ मौजूद थे। फॉर्मासिस्ट ने स्टाफ की मदद से मरीज को प्राथमिक उपचार दिलाया। इसके बाद मरीज को रेफर कर दिया गया।
केस-दो
चौहानपुर गांव निवासी उदय प्रताप सिंह की पांच वर्षीय पुत्री वैष्णवी के कान में दाना चला गया। परिजन उसे लेकर रविवार की सुबह 11:40 बजे जिला अस्पताल की इमरजेंसी पहुंचे। यहां मिनी ओटी में संविदा कर्मी दुर्घटना में घायल होकर पहुंचे मरीज को उपचार देने में व्यस्त थे। करीब 15 मिनट बाद संविदा कर्मचारियों ने बच्ची के कान से दाना निकालने के साथ उसे उपचार दिया।
केस-तीन
बिछवा थाना क्षेत्र के हबिलिया गांव निवासी महरवान सिंह दुर्घटना में घायल हो गए। परिजन दोपहर करीब बारह बजे उन्हें लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। यहां ड्रेसिंग रूम में स्टाफ ने ही उन्हें देखा और उपचार किया। डॉक्टर रूम से बाहर नहीं आए। कमरे से ही मरीज के रेफर स्लिप पर हस्ताक्षर कर दिए।
लापरवाही की जांच कराई जाएगी-सीएमएस
सीएमएस डॉ. मदनलाल ने कहा कि ईएमओ सहित सभी स्टाफ को इमरजेंसी ड्यूटी पर सजग रहना चाहिए। जब कोई मरीज नहीं होता है तो डॉक्टर रेस्ट रूम में चले जाते हैं। लेकिन, मरीज आने पर उसे उपचार देते हैं। उपचार में लापरवाही की बात है तो इसकी जांच कराई जाएगी।