डिप्टी सीएम के निरीक्षण की संभावना पर मरीजों को लिया हाथों हाथ,
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बेड-स्ट्रेचर पर नई चादर, व्हीलचेयर भी नई। एंबुलेंस में मरीज आया तो वार्ड ब्वाय दौड़े, झटपट मरीज को स्ट्रेचर पर लेकर अंदर गए। वार्ड में मरीज को हाथों हाथ लेते हुए डाक्टर समेत नर्सिंग स्टाफ इलाज में जुट गया। ये नजारा बुधवार को एसएन मेडिकल कालेज की इमरजेंसी में देखने मिला।
डाक्टर और नर्सिंग स्टाफ में ये बदलाव एकाएक नहीं बल्कि डिप्टी सीएम के निरीक्षण का भय की वजह से था। दरअसल, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के एसएन में निरीक्षण की सूचना पर सुबह से ही माहौल बदला हुआ था। चतुर्थ श्रेणी से लेकर वरिष्ठ चिकित्सक तय समय पर ड्यूटी पर थे। एप्रिन भी पहने हुए थे। हर आधे घंटे बाद झाड़ू-पोंछा लग रहा था। मरीजों के बेड पर जाकर बार-बार उनसे तकलीफ पूछी जा रही थी। कुल मिलाकर सुबह दस से शाम चार बजे तक मरीज वीआइपी ट्रीटमेंट में रहे।
निरीक्षण कैंसल, हालत फिर वही
सुबह से ही मरीजों को वीआईपी ट्रीटमेंट दिया जा रहा था, दौरा कैंसल होने के बाद हालात फिर वही पुराने हो गए। स्ट्रेचर से चादर गायब हो गया। गेट से स्ट्रेचर और व्हील चेयर भी अंदर रख दिए गए। एंबुलेंस से मरीजों को उतारने के लिए कोई नहीं पहुंचा। तीमारदारों को ही ये कार्य करना पड़ा। अंदर पहुंचे तो वरिष्ठ चिकित्सक भी घर जाने की तैयारी में थे, जूनियरों के देख लेने की बोलकर वह भी निकल गए। मरीज इलाज के लिए जूनियर डाक्टरों की ओर ताकते रहे।
चल यार धक्का लगा...
इमरजेंसी में खराब एंबुलेंस गेट पर खड़ी थी। डिप्टी सीएम के आने को देखते हुए इसे हटाया जाने लगा। खराब एंबुलेंस को हटाया कैसे जाए, इसके लिए कर्मचारियों ने एंबुलेंस को धक्का मारकर किनारे लगाया।
फोन पर लेते रहे लोकेशन
लेडी लायल और जिला अस्पताल में भी डिप्टी सीएम के निरीक्षण में शामिल नहीं थे, फिर भी यहां के चिकित्सक जमे रहे। फोन पर डिप्टी सीएम के आने और उनकी लोकेशन पता करते रहे। बिना निरीक्षण चले जाने के बाद चिकित्सकों ने राहत की सांस ली।