सैंया से आईं खातून ने बताया कि उन्हें फोड़े हो गए हैं। ओपीडी पर गई तो कहा कि सर्जरी विभाग के मरीज गुरुवार को देखे जाएंगे। इसके लिए फोन पर नंबर लगा दो, लेकिन दर्द होने पर उन्होंने कहा इमरजेंसी चले जाओ, वहां भी कोई सुनवाई नहीं हुई। फुटबाल बना दिया है।
नई बस्ती निवासी सलमा ने कहा कि दांत और कान की परेशानी हैं, दर्द अधिक हो रहा है। पस भी आने लगा है। परेशानी बढ़ने पर इमरजेंसी आया तो एसएन की ओपीडी भेज दिया। नंबर लगवाने को कहा, लेकिन फोन काम नहीं कर रहा था। क्या करें फोन और नंबर नहीं होगा तो इलाज नहीं मिलेगा।
फतेहाबाद के कप्तान सिंह ने कहा कि छाती में जकड़न और सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। परेशानी होने पर एसएन कॉलेज की ओपीडी में आया। यहां पर नंबर लगाने वालों को ही प्रवेश दिया जा रहा था। फोन कर नंबर लगा नहीं पाया। दिक्कत होने पर ओपीडी से विभाग के चक्कर काटते रहे।
व्यवस्था की जानकारी न होने से दिक्कत
प्राचार्य डॉ. संजय काला ने बताया कि किसी भी बीमारी के गंभीर मरीज को इमरजेंसी भेज रहे हैं। हालत गंभीर होने पर डॉक्टर भर्ती कर लेते हैं, बाकी को अगले दिन सामान्य ओपीडी में दिखाने के लिए बता देते हैं। अभी पंजीकरण व्यवस्था की जानकारी न होने से शुरुआत में दिक्कत हो रही है।