कोरोना संक्रमित होने की रिपोर्ट आने का मतलब यह नहीं है कि तुरंत अस्पताल में भर्ती हो जाएं। होम आइसोलेशन में उचित उपचार किया जा सकता है। ऑक्सीजन का स्तर 90 प्रतिशत से कम होने पर चिकित्सक के परामर्श पर अस्पताल का रुख करना चाहिए। यह कहना है आगरा के आईएमए पदाधिकारी डॉ. पंकज नगायच का।
उन्होंने बताया कि सबसे पहले यह जानना आवश्यक है कि कृत्रिम ऑक्सीजन हमें कब चाहिए। जब तक हमारा ऑक्सीजन प्रेशर 94 से 95 परसेंट है (जोकि पल्स ऑक्सीमीटर से नापा जाता है) तब तक हमें किसी प्रकार की चिंता नहीं करनी चाहिए। कोरोना से पीड़ित व्यक्ति तब तक होम आइसोलेशन में रहें। होम आइसोलेशन का मतलब है कि चिकित्सकीय परामर्श के साथ घर पर आराम करें।
जीनोम डायग्नोस्टिक्स के डायरेक्टर डॉ. पंकज ने बताया कि सबसे ज्यादा कारगर आज भी सैनिटाइजेशन, मास्क एवं सोशल डिस्टेंसिंग है। जिससे हम कोरोना पर काबू पा सकते हैं ।
आईएमए के सांस्कृतिक सचिव डॉ. पंकज का कहना है कि रेमडेसिविर जैसी दवाई को लेकर लोगों में भ्रम है। इसकी घोर कमी से मरीजों एवं तीमारदारों में बहुत पैनिक है। यह दवा कब लेनी है कितनी लेनी है इसके बारे में अधिकांश लोग नहीं जानते हैं। यह कोई जादू की गोली नहीं है जो कोरोना को समाप्त कर देगी।
शुरू के कुछ दिनों में बीमारी के तीन से 10 दिनों के अंदर देने पर यह पाया गया कि कुछ लोगों में यह लक्षणों को हल्का कर सकती है एवं हॉस्पिटल स्टे थोड़ा सा कम कर सकती है। अभी भी कोई बहुत साइंटिफिक डाटा इस दवा को लेकर हमारे पास नहीं है।
इन बातों का रखें ध्यान
- दिन में दो-तीन बार भाप लें, ठंडे पानी से परहेज करें, गरम पानी पीएं
- रोजाना धूप सेंकनी चाहिए, सुबह के समय धूप सेकें तो बेहतर रहेगा
- रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले खाद्य हल्दी, काली मिर्च, लहसुन भोजन में बढ़ाएं
- पौष्टिक भोजन करें। आहार में फल बढ़ाएं, संतुलित मात्रा में चीजों का सेवन करें
- नियमित प्राणायाम व योगासन से भी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ा सकते हैं