एसएन मेडिकल कॉलेज इमरजेंसी में चिकित्सकों का अमानवीय चेहरा सामने आया। गेट के बाहर इलाज के लिए घंटे भर तक बच्ची तड़पती रही, लेकिन भर्ती नहीं किया।
हालत खराब बताते हुए उसे दिल्ली या फिर जयपुर ले जाने को कहते हुए भगा दिया। वहीं इस मामले में प्राचार्य जीके अनेजा का कहना है कि मरीज की हालत कैसी भी हो उसे भर्ती जरूर किया जाना चाहिए।
किरावली निवासी माणिकचंद की बेटी मुस्कान (12) को टायफायड से पीड़ित है। वह सुबह करीब साढ़े ग्यारह बजे बच्ची को लेकर इमरजेंसी पहुंचे। यहां पर चिकित्सकों ने बिना भर्ती किए ही उसकी हालत खराब बताई और दिल्ली-जयपुर ले जाने की कहा। माणिक चंद और उनके साले राजकपूर ने कहा कि उनके पास पैसों का इंतजाम नहीं है, यहीं भर्ती कर इलाज कर दो।
कई बार वह गिड़गिड़ाए, यहां तक कि घंटे भर तक वह बच्ची को स्ट्रेचर पर लेकर बाहर ही इलाज की आस में बैठे रहे, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। ऐसे में मजबूरी में वह बच्ची को लेकर किरावली लौट आए। मरीज के पिता माणिकचंद ने बताया कि 15 दिन से बीमार है, खून की कमी भी है।
इमरजेंसी इलाज के लिए लाए, लेकिन इलाज नहीं मिला। दिल्ली-जयपुर ले जाने की कहते हुए इमरजेंसी के बाहर ही निकाल दिया। मरीज के मामा राज कपूर का आरोप है कि बच्ची की जांच भी नहीं की और दूर से देखकर ही हालत खराब बताते हुए गेट से ही लौटा दिया।
प्राचार्य ने विभागाध्यक्ष से मांगी रिपोर्ट
प्राचार्य की जानकारी में आने पर उन्होंने पूरे मामले की बाल रोग विभागाध्यक्ष से रिपोर्ट मांगी है। साथ ही तीमारदार का नंबर विभागाध्यक्ष को उपलब्ध कराते हुए मरीज को बुलाकर भर्ती कराने के भी निर्देश दिए हैं।
हालत कैसी भी हो, भर्ती करना जरूरी
मरीज की हालत कैसी भी हो, उसे भर्ती जरूर किया जाना चाहिए। मरीज हित में उसे हायर सेंटर रैफर किया जा सकता है। मरीज क्यों नहीं भर्ती किया, इसकी रिपोर्ट विभागाध्यक्ष से तलब की है। उनको मरीज बुलाकर इलाज देने के भी निर्देश दिए हैं। - डॉ. जीके अनेजा, प्राचार्य
बाह की बच्ची को भी नहीं किया था भर्ती
आगरा। बीते दिनों बाह की नौ साल की बच्ची को भी इमरजेंसी में भर्ती नहीं किया था। इसे कुत्ता ने काट लिया था। यहां इलाज न होने की बात कहते हुए उसे भगा दिया था। बाद में उसकी मौत हो गई थी।