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बड़ा खुलासा: पैथोलॉजी देतीं गंभीर बीमारी की फर्जी रिपोर्ट, फिर अस्पताल में भर्ती कर डॉक्टर करते हैं मोटी कमाई

Mon, 03 Jul 2023 09:51 AM IST
धीरेन्द्र सिंह धर्मेंद्र त्यागी, आगरा

सार

स्वास्थ्य विभाग द्वारा पैथोलॉजी लैब पर चल रही छापेमार कार्रवाई में बड़ा खेल सामने आया है। सील हुई पैथोलॉजी में जांच कराई गई तो पता चला कि यहां जमकर फर्जीवाड़े का बड़ा खेल चल रहा था। स्वास्थ्य विभाग ने पैथोलॉजी लैब से 100 से अधिक मरीजों की जांच रिपोर्ट जब्त की, जिसमें पता चला कि खून की फर्जी जांच कर किडनी-मलेरिया का रोगी बना दिया।
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डायग्नोस्टिक पैथोलॉजी लैब - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में अस्पताल और पैथोलॉजी लैब संचालकों का रैकेट सक्रिय है, जो मरीजों को गंभीर बीमारी का डर दिखाकर उनकी जेबों पर डाका डाल रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने सील की गई पैथोलॉजी लैब से जब्त की रिपोर्ट की जांच में ये खुलासा हुआ है कि झोलाछाप ने खून, पेशाब, वीर्य की जांच कर फर्जी रिपोर्ट बनाई और मोटी कमाई की। स्वस्थ लोगों को किडनी, लिवर, एनीमिया, मलेरिया का बीमार बना दिया।
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सीएमओ डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि बीते 8 दिन में सील की गई 11 पैथोलॉजी लैब में डॉक्टर नहीं मिले। यहां डॉक्टर और क्वालीफाइड टेक्नीशियन और विशेष जांच के लिए जरूरी उपकरण भी नहीं मिले। इनके यहां से जब्त की गई 100 से अधिक रिपोर्ट में बीमारियों की रिपोर्ट संदिग्ध मिली है।

संचालक ने फर्जी जांच रिपोर्ट तैयार कर मरीज को मलेरिया, हेपेटाइटिस, थायरायड, एनीमिया, किडनी-लिवर और यूरिन इन्फेक्शन की बीमारी दर्शा दी। मरीजों से एलाइजा टेस्ट की कीमत वसूलते थे और घटिया रैपिड किट से जांच कर स्वस्थ लोगों के बीमार होने की रिपोर्ट बनाते। संचालक ही इन पर डॉक्टर के फर्जी हस्ताक्षर कर मरीजों का बांट रहे थे।

अस्पताल संचालकों की मिलीभगत से ठगी

अपंजीकृत अस्पताल सेल के नोडल अधिकारी डॉ. सुरेंद्र मोहन प्रजापति ने बताया कि यमुनापार में अस्पताल-पैथोलॉजी लैब संचालकों का रैकेट सक्रिय है। ये खासतौर से देहात के मरीजों को सस्ते इलाज के नाम पर भर्ती करते हैं। तय पैथोलॉजी लैब वाले से खून, वीर्य, मूत्र समेत अन्य की जांच करवाकर फर्जी रिपोर्ट बनाकर अस्पताल में भर्ती करवाते हैं। पांच-सात दिन भर्ती के बाद फिर से जांच करा मर्ज ठीक दिखा देते। इससे दोनों की कमाई होती है।

गंभीर बीमारी की जांच नहीं

इंडियन एसोसिएशन ऑफ पैथोलॉजिस्ट एंड माइक्रोबाइलोजिस्ट कोषाध्यक्ष डॉ. हरेंद्र यादव ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि बिना डॉक्टर के पैथोलॉजी लैब नहीं चल सकती। गंभीर बीमारियों की जांच डॉक्टर ही कर सकता है, आधुनिक मशीन भी जरूरी हैं। इस तरह की पैथोलॉजी लैब में ब्लड कैंसर के सेल, सिफलिस, एप्लास्टी एनीमिया की जांच नहीं हो सकती है।

केस एक

नाऊ की सराय निवासी दिनेश कुमार ने एमपैथ लैब से जांच कराई। जांच में प्लेटलेट्स 90 हजार और हीमोग्लोबिन 9.8 ग्राम बताया। रिपोर्ट पर संदेह हुआ तो शहर की मुख्य लैब में जांच कराई, जिसमें उसकी प्लेटलेट्स 1.60 लाख और हीमोग्लोबिन 12.50 ग्राम मिला।
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केस दो

खंदौली के अनिल शर्मा ने जांच के लिए यूरिन और ब्लड का नमूना दिया। फर्जी जांच कर किडनी का मरीज बता दिया। यमुनापार के ही अस्पताल में भर्ती हो गया। चार-पांच दिन बाद फिर से जांच में रिपोर्ट सामान्य बताई। सरकारी अस्पताल में दिखाया तो उसे किडनी की बीमारी के लक्षण भी नहीं मिले।
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