उत्तर प्रदेश के आगरा में चंबल नदी की बीच धारा में मंगलवार को 150 यात्रियों से भरा स्टीमर फंस गया। इससे यात्रियों की जान हलक में आ गई। चंबल में स्टीमर के खराब होने या फंसने की यह कोई पहली घटना नहीं थी। इससे पहले 20 जून और 2 जुलाई 2023 को पंखा (स्टीयरिंग) में तकनीकी खामी आने से ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं। उस समय करीब 200 यात्री सवार थे। वह बेहद दहशत में थे।
विज्ञापन
संचालकों ने रस्सी के सहारे खींचकर स्टीमर को किनारे कर पहुंचाया था। उन दोनों घटनाओं के समय पक्का पुल बनाने में तेजी लाने की आवाज उठी। दिखावे के लिए लोक निर्माण विभाग के अधिशाषी अभियंता पीके शरद ने ठेकेदार को नोटिस जारी किया। लेकिन यह सिर्फ खानापूर्ति तक ही सीमित रहा। मामला पुराना हुआ और कोई एक्शन हुआ न ही ठेकेदार ने दोनों घटनाओं से कोई सबक लिया।
रहता है मगरमच्छों के हमले का खतरा
चंबल नदी में मगरमच्छ के हमले का खतरा भी रहता है। 20 जून 2023 को हैचिंग पीरियड में मोटरबोट का पंखा खराब हो गया। इससे रस्सी के सहारे कर्मचारी स्टीमर को किनारे तक खींचकर लाए थे। गनीमत रही कि मगरमच्छ हमलावर नहीं हुए। इसी सीजन में 2 जुलाई 2023 को भी पंखे में रस्सा फंसने से नदी में स्टीमर आगे नहीं बढ़ रही थी। इस कारण नदी में उतरकर पंखे से रस्सा निकाला गया।
गनीमत रही कि इस समय भी मगरमच्छ का हमला तो बच गया, लेकिन खतरे की वजह से यात्रियों की जान हलक में अटकी रही। एक बात और मानवीय गतिविधियां नदी में बढ़ने पर घड़ियाल और मगरमच्छ अपना ठिकाना बदल सकते हैं। दोनों जीवों को रहने के लिए शांत माहौल चाहिए। इससे उन्हें भी नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है।
अब तीसरा हादसा दो दिन पहले 26 सितंबर 2023 को हुआ। जब करीब 150 यात्रियों से भरा स्टीमर पिनाहट क्षेत्र के चंबल की बीच धारा में फंस गया। इस बार वह खराब नहीं हुआ था बल्कि पक्के पुलिस के पिलर में लगी सरिया से पंस गया था। हालात कुछ भी रहे हों लेकिन खतरा तो यात्रियों की ही जान को हुआ। जब तक यात्रियों का रेस्क्यू नहीं हो गया, तब तक उनकी जान हलक में अटकी रही।
लाइफ जैकेट पहनकर एक बार में 75 यात्री ही होंगे नदी पार
चंबल की धारा में 150 यात्रियों की जान जोखिम में पड़ने के बाद अब एक बार फिर अधिकारी सक्रिय दिखाई दे रहे हैं। स्टीमर के चंबल नदी के बीच निर्माणाधीन पक्के पुल के पिलर के सरियों में फंसने की जांच करने के लिए पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन हेमंत कुमार बुधवार को मौके पर पहुंचे। उन्होंने निर्देश दिया कि मानक सुरक्षा पूरे होने के बाद मोटरवोट (स्टीमर) का संचालन किया जाएगा।
हादसे के एक दिन बाद बुधवार को मोटरवोट का संचालन नहीं होने से मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के यात्रियों को बैरंग घर वापस लौटना पड़ा। एक्सईएन ने अधीनस्थों से मामले में जानकारी ली। उन्होंने ठेकेदार, चालक एवं कर्मचारियों की लापरवाही पर जमकर फटकार लगाई। इस दौरान दो फीट जाली चारों तरफ से लगाने एवं स्टीमर की स्थिति को पूरी तरह से ठीक करने के सख्त निर्देश दिए। कहा कि एक बार में 75 यात्रियों को लाइफ जैकेट पहनाकर ही नदी पार कराया जाएगा। दिन में करीब आठ चक्कर ही लगाए जाएंगे।