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भाई के लिए डिब्रूगढ़ राजधानी एक्सप्रेस रोकने को युवक ने दी बम होने की झूठी सूचना, गिरफ्तार

Sat, 29 Feb 2020 07:21 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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आरोपी युवक से पूछताछ करते अधिकारी - फोटो : Amar Ujala
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ग्वालियर के युवक ने अपने भाई की ट्रेन चार घंटे लेट होने पर दिल्ली से डिब्रूगढ़ जाने वाली राजधानी एक्सप्रेस को दिल्ली में ही रोके रखने के लिए पांच बम रखे होने की सूचना रेल मंत्री के आधिकारिक ट्विटर एकाउंट पर दे दी। 
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इसके बाद दिल्ली से आगरा तक रेल सुरक्षा बलों में हड़कंप मच गया। ट्रेन को अलीगढ़ के दादरी रेलवे स्टेशन पर तीन घंटे तक रोककर चेक किया गया। सूचना के फर्जी पाए जाने के बाद जीआरपी की टीमों ने आरोपी को आगरा के ईसे गिरफ्तार कर लिया। उसके विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया गया है।

एसपी जीआरपी जोगेंद्र सिंह ने बताया कि ग्वालियर के मुरार निवासी संजीव सिंह गुर्जर ने शुक्रवार को शाम 4.12 बजे रेल मंत्री पीयूष गोयल को टैग करते हुए ट्वीट किया दिल्ली से कानपुर सेंट्रल जा रही डिब्रूगढ़ राजधानी में पांच बम रखे हैं, कृपया जल्दी कोई एक्शन लें। 
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खुद बताया मानसिक तनाव में

इसके बाद दिल्ली से आगरा तक रेल महकमे में हड़कंप मच गया। ट्रेन तब तक गाजियाबाद पहुंच चुकी थी। अलीगढ़ के दादरी स्टेशन पर ट्रेन को तीन घंटे तक रोका गया और सघन तलाशी ली गई। इसी बीच युवक ने ट्विटर पर दूसरा मैसेज किया कि ये ट्वीट मेरे द्वारा मानसिक तनाव की स्थिति में किया गया है। 
 

इस पर अधिकारियों ने राहत की सांस ली। ट्रेन को गंतव्य के लिए रवाना करने के बाद आरोपी की तलाश शुरू कर दी गई। एसपी ने बताया कि अलीगढ़, आगरा कैंट की टीमों ने एएसपी अनुराग दर्शन के साथ युवक को ईदगाह स्टेशन पर गिरफ्तार कर लिया। 

संजीव सिंह ने पुलिस को बताया कि उसका भाई राहुल असम में आर्मी में तैनात है। वो ग्वालियर से केरला एक्सप्रेस से दिल्ली जा रहा था, जहां से उसे डिब्रूगढ़ राजधानी पकड़नी थी, लेकिन केरला के चार घंटे लेट होने के बाद भाई ने इसकी जानकारी दी। इसी लिए उसने ट्रेन में बम रखे होने की सूचना देकर ट्रेन को दिल्ली में ही रोके जाने के लिए ट्वीट किया था।

 

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गंभीर धाराओं में दर्ज किया मुकदमा

आरोपी के खिलाफ आगरा कैंट थाने में रेलवे एक्ट और 505 (बी) सरकारी जनसूचना साधन पर अफवाह या भ्रामक जानकारी देने का मुकदमा दर्ज किया गया है। 

एसपी जीआरपी ने बताया कि मुकदमा गंभीर धाराओं में दर्ज किया गया है, ताकि लोग इस तरह की झूठी सूचना सोशल मीडिया या सरकारी हेल्पलाइनों पर देने से बचें। इसमें तीन से छह साल तक की सजा और 50 हजार रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।
 

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