क्षेत्रीय समस्याओं को नगर निगम सदन में उठाने का भरोसा दिलाने वाले
पार्षदों ने शनिवार को सदन की बैठक के दौरान उनके भरोसे का ‘सौदा’ कर दिया।
मानसून में जलभराव से मुक्ति के लिए किए जाने वाले इंतजामों पर चर्चा को
बुलाया गया विशेष सदन आपसी राजनीति में उलझकर रह गया। भाजपा, सपा और बसपा
के पार्षद एकजुट होकर समस्या को भूल अफसरों की तारीफ करने में लग गए। हद तो
तब हो गई, जब समस्या के समाधान के लिए अधिकारियों के बिना मांगे ही पार्षद
दल के नेताओं ने उन्हें दस दिन का समय दे दिया। इस दौरान कूड़ा और सिल्ट
उठान पर विस्तृत चर्चा नहीं हो पाई।
नाला सफाई न होने, खत्ताघर की
स्थिति और शहर से कूड़ा व सिल्ट न उठने की समस्या को लेकर कुछ पार्षदों की
मांग पर बुलाए गए विशेष सदन की शुरुआत हंगामे से हुई। निर्दलीय पार्षद रवि
माथुर ने कहा कि शहर के अधिकांश नाले साफ नहीं हुए हैं। इसके बावजूद पिछले
महीने हुए सदन में पर्यावरण अधिकारी राजीव राठी ने 80 फीसदी नाले साफ होने
का दावा किया था। इसी पर सदन में चर्चा शुरू हुई। कई पार्षदों ने सफाई के
नाम पर हुई खानापूर्ति पर सवाल उठाए। तभी भाजपा पार्षद दल नेता कुंदनिका
शर्मा, सपा पार्षद दल नेता मुकेश यादव और बसपा पार्षद दल नेता कर्मवीर सिंह
भारती सदन से बाहर चले गए। कुछ देर बाद मंथन करके लौटे तो सदन का माहौल
बदल गया। कुंदनिका शर्मा ने आते ही अधिकारियों की तारीफ की। कहा कि हो सकता
है कि बड़े नाले साफ न हुए हों लेकिन छोटे नाले लगभग साफ हो चुके हैं।
इसके लिए अधिकारी और कर्मचारी बधाई के पात्र हैं। उन्होंने बिना चर्चा पूरी
हुए ही अपनी तरफ से नालों की सफाई के लिए अफसरों को सात दिन का समय दे
दिया। सपा के मुकेश यादव ने उनका समर्थन करते हुए इस अवधि को दस दिन करने
का प्रस्ताव रखा। महापौर इंद्रजीत सिंह आर्य और नगर आयुक्त इंद्रविक्रम
सिंह की मौजूदगी में सफाई अभियान चलाने का सुझाव रखा। इस मुद्दे पर बसपा
पार्षद दल के नेता कर्मवीर भारती न तो कुछ बोले और न ही किसी का विरोध
किया। बाद में पार्षद हेमंत प्रजापति ने कहा कि अधिकारियों को नाला सफाई के
लिए अब समय देने का कोई औचित्य नहीं है। मानसून आ चुका है। नियम के
मुताबिक, यह तैयारी निगम को पहले करनी थी। अब सिर्फ जवाब देना था। उन्होंने
सवाल उठाया कि अब तक नगर निगम क्यों सोता रहा। हालांकि, उनके विरोध का असर
नहीं पड़ा। बाद में नगर आयुक्त ने दस दिन में स्थिति सुधारने के लिए
अधीनस्थों को निर्देश दिया। महापौर ने भी अपनी मुहर लगा दी। इसी खानापूर्ति
के साथ बिना किसी ठोस जवाबदेही के विशेष सदन का समापन हो गया।
दस दिन में कैसे साफ होंगे नाले!
सदन
ने नाला सफाई के लिए दस दिन की और मोहलत दे दी है। मगर, कुछ पार्षदों ने
इस पर सवाल खड़े किए हैं। दरअसल, 17 जून को सदन की बैठक में सभी दलों के
पार्षदों के मोर्चा खोलने पर नगर आयुक्त ने अधीनस्थों को नाला सफाई के लिए
पुन: आदेशित किया था। इसके बाद भी तली झाड़ सफाई नहीं हो पाई थी। अब इन दस
दिनों में नाले कैसे साफ हो जाएंगे।
महापौर को लेकर चले व्यंग्यवाण
सदन
के दौरान महापौर को लेकर सपा और भाजपा पार्षदों में खूब व्यंग्यवाण चले।
सपा पार्षद ने कहा कि पहले जो (महापौर की ओर इशारा करते हुए) तुम्हारे हुआ
करते थे, आज वो हमारे हैं। भाजपा पार्षद भी जवाब देने से पीछे नहीं रहे।
कहा कि जो कल हमारे नहीं थे, तो क्या गारंटी आने वाले कल में वो तुम्हारे
ही रहेंगे।
सरकारी सामान की नहीं है चिंता
कुबेरपुर स्थित
खत्ताघर की जांच के गठित समिति ने रिपोर्ट में खुलासा किया था कि कूड़ा
निस्तारण प्लांट के कल-पुर्जे और कई मशीनें चोरी हो चुकी हैं। शनिवार को
सदन की बैठक में मुद्दा उठने पर नगर आयुक्त ने जवाब दिया कि जिस कंपनी ने
प्लांट का ठेका लिया था, उसके जाने के बाद उसकी सिक्योरिटी मनी में से वसूल
कर लिया गया है। मगर, पार्षदों का सवाल था कि मौके पर जो सामान है, उसकी
चिंता कौन करेगा। सामान चोरी की थाने में रिपोर्ट क्यों नहीं दर्ज कराई गई।
वहीं कूड़ा उठान पर पार्षदों का कहना था कि कूड़ा खत्ताघर नहीं पहुंच रहा
है। इस पर नगर आयुक्त ने जवाब दिया कि अधिकांश कूड़ा खत्ताघर ही जा रहा है।
हो सकता है कि कुछ कर्मचारी कूड़ा कहीं और डाल रहे हों। मगर, अब ऐसा नहीं
होगा। क्योंकि निगम की गाड़ियों में जीपीएस सिस्टम लगाया जाएगा। मगर,
पार्षदों का कहना था कि इसमें दोषी लोगों को चिह्नित क्यों नहीं किया गया?
कुंदनिका के वार्ड में ही साफ नहीं हुई नालियां
नगर
निगम सदन के दौरान भाजपा पार्षद दल की नेता कुंदनिका शर्मा ने छोटी
नालियों के साफ होने का दावा कर अधिकारियों की खूब वाहवाही की थी। मगर,
हकीकत कुछ और है। हो सकता है कि सदन में राजनैतिक दांवपेच के चक्कर में
उन्हें अपने ही वार्ड की गंदी नाली याद न रही हो लेकिन हकीकत क्या है, यह
उनके क्षेत्र की जनता से बेहतर कोई नहीं जानता। उनके वार्ड में अधिकांश
नालियां कूड़े से चोक हैं। अगर, यह साफ नहीं हुई तो मानसून में जलभराव होना
तय है।