रक्षा संपदा विभाग ने बिजलीघर स्थित संत रविदास नगर की जमीन को कब्जा मुक्त कराने के लिए शनिवार सुबह गरीबों की 300 झुग्गी-झोपड़ियों को बुलडोजर से ध्वस्त करा दिया। तकरीबन चार दशक से यहां रह रहे दो हजार से ज्यादा लोग बेघर हो गए। भारी पुलिस फोर्स के कारण वे विरोध भी नहीं कर सके। अपनी आंखों के सामने अपने घरौंदों को उजड़ता देख आंसू बहाते रहे। उन्हें चिंता सता रही है कि ऐसे में यदि बारिश हुई तो वे कहां जाएंगे। इन विस्थापित लोगों के पुनर्वास के लिए न तो रक्षा संपदा विभाग और न ही राज्य सरकार कोई फैसला ले सकी है। कार्रवाई से एक दिन पूर्व केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री से गुहार लगाने के बाद भी विभाग का फैसला नहीं टाला जा सका।
आगरा किला के सामने रक्षा संपदा की 22.777 एकड़ जमीन सर्वे नंबर 319 में दर्ज है। इसके एक हिस्से में तकरीबन 40 वर्षों से लोग झुग्गी-झोपड़ियां बनाकर रह रहे थे। शनिवार सुबह 10:30 बजे रक्षा संपदा विभाग के अधिकारियों के साथ सेना, सीएमपी और पुलिस की कई गाड़ियां एक साथ बस्ती में पहुंचीं तो लोगों में खलबली मच गई। घरौंदे तोड़े जाने के आदेश मिलने के साथ ही लोग अपना समान समेटने लगे। देखते ही देखते जेसीबी मशीन ने झुग्गी-झोपड़ियों को तोड़ डाला। कुछ देर पहले तक हंसी खुशी से गुलजार बस्ती वीरान हो गई। घरों में चूल्हे तक नहीं जले। कई लोगों ने अभियान से पूर्व 10 दिन की मोहलत मांगी, लेकिन अधिकारियों ने अनसुना कर दिया। जिन्होंने विरोध किया उन्हें पुलिस ने धमकाकर चुप करा दिया। इस अभियान के दौरान स्टेशन कमांडर बिग्रेडियर विकास सैनी, रक्षा संपदा अधिकारी सुब्रत पाल, एसीएम चतुर्थ एमपी सिंह, सीओ असीम चौधरी आदि अधिकारी मौजूद रहे।
दो दिन तक क्षेत्र में लगातार मुनादी कराई गई थी। झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले लोगों को बताया गया कि वह गैर कानूनी रूप से रह रहे हैं। यह भूमि रक्षा संपदा विभाग की है। इसलिए हमने शनिवार को अभियान चलाकर अपनी जमीन खाली करवा ली।
- सुब्रप पाल, रक्षा संपदा अधिकारी