ताजनगरी में कोरोना ने जब दस्तक दी तब श्री पारस अस्पताल ने 11 जिलों में संक्रमण फैलाया था। अस्पताल को सील किया गया। डॉ. अरिन्जय जैन व प्रबंधक के खिलाफ जिला प्रशासन ने महामारी फैलाने का मुकदमा दर्ज कराया था। पहली लहर में इतनी लापरवाही सामने आने के बाद दूसरी लहर में फिर जिला प्रशासन ने अस्पताल को कोविड सूची में शामिल कर लिया।
पहली लहर में 26 मार्च से 6 अप्रैल तक श्री पारस अस्पताल में 96 मरीज भर्ती थे। जिनमें 16 संक्रमित निकले। संक्रमितों की सूचना प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग को नहीं दी गई। अस्पताल शहर का सबसे बड़ा हॉटस्पॉट साबित हुआ।
यहां से जिन मरीजों को डिस्चार्ज किया गया उनसे संक्रमण फैलन की आशंका पर एडीएम प्रशासन निधि श्रीवास्तव ने 11 अप्रैल को 11 जिलों के डीएम को पत्र लिखा। जिसमें उनसे अपने जिलों के मरीजों की जांच कराने का अनुरोध किया। तब आगरा में संक्रमण की शुरुआत थी। जिसमें श्री पारस सबसे बड़ा हॉटस्पॉट बनकर उभरा था। करीब दस महीने तक श्री पारस के विरुद्ध दर्ज मुकदमे में कोई दंडात्मक कार्रवाई पुलिस व प्रशासन ने नहीं की। बाद में अस्पताल को चोरी-छिपे क्लीन चिट मिल गई। इसके पीछे शहर के एक जनप्रतिनिधि का हाथ माना जा रहा है। अस्पताल संचालक जनप्रतिनिधि का रिश्तेदार है।