विकृत-लकवाग्रस्त चेहरे की सर्जरी में आर्टिफिशयल इंटेलीजेंसी (एआई) मददगार साबित होगा। एआई की मदद से नस-मांसपेशियों के ट्रांसप्लांट से लकवाग्रस्त चेहरे को ठीक कर खूबसूरत बनाया जा सकता है।
एसोसिएशन ऑफ मैक्सिलोफेशियल सर्जंस ऑफ इंडिया (एओएमएसआई) की कार्यशाला में विकृत-लकवाग्रस्त चेहरे की सर्जरी की आधुनिक विधियों पर विशेषज्ञों ने व्याख्यान दिया। फतेहाबाद रोड स्थित होटल के दूसरे दिन डॉक्टरों ने बताया कि आर्टिफिशयल इंटेलीजेंसी (एआई) की मदद से नस-मांसपेशियों के ट्रांसप्लांट से लकवाग्रस्त चेहरे को ठीक कर खूबसूरत बना रहे हैं।
विज्ञापन
एओएमएसआई के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजीव नायर ने बताया कि लकवा से मांसपेशियां और नस प्रभावित होने से चेहरा टेढ़ा हो जाता है। इससे मरीज को बोलने, चबाने में दिक्कत होती है। इसमें एआई की मदद से चेहरे की डिजाइन बनाकर मरीज के शरीर से नस-मांसपेशियां लेकर विकृत हिस्से की सर्जरी करते हैं। इसमें 5 घंटे से अधिक का समय लगता है। इसके 4-5 महीने मरीज फॉलोअप में रखकर स्पीच थैरेपी-फिजियोथेरेपी भी कराते हैं। इसके बाद मरीज अपने पूर्व की स्थिति का चेहरा प्राप्त कर लेता है। कई सरकारी मेडिकल कॉलेजों में ये सर्जरी हो रही है। निजी में डेढ़ लाख रुपये से अधिक का खर्चा आता है।
विशेषज्ञ डॉ. अत्रेय राजगोपाल ने कॉस्मेटिक फेशियल सर्जरी से नाक, कान, ठोढ़ी को खूबसूरत करने के लिए सर्जरी का चलन तेजी से बढ़ा है। एआई से सर्जरी और सटीक हो रही है। सर्जरी कराने वालों में 50 फीसदी खूबसूरती के लिए और बाकी के बीमारी, मुहांसे, चोट समेत अन्य वजहों से चेहरा बदसूरत होने पर सर्जरी करा रहे हैं। इनमें युवाओं की संख्या 80 फीसदी है।
डॉ. नेहल पटेल ने बताया कि सर्जरी में एआई के अलावा आधुनिक सॉफ्टवेयर, उपकरण और नई तकनीक भी उपयोग में लाई जा रही है। इससे नाक, होठ, कान में बदलाव कर चेहरे को पहले से भी ज्यादा खूबसूरत बना सकते हैं। इंग्लैंड के डॉ. नायल मैकलियोड्स ने दुर्घटना में जबड़े के टूटने के मामले दुनिया में बढ़ रहे हैं। इनमें युवा अधिक हैं। इनकी सर्जिकल तकनीकी, प्लेटिंग और एआई से नया कृत्रिम जबड़ा भी बनाया जा रहा है। कार्यशाला अध्यक्ष डॉ. एसके कठारिया, सचिव डॉ. गौरव गुप्ता, डॉ. मदन मिश्रा, डॉ. निखिल पंडित, डॉ. आतिश कुंदू, डॉ. आरके सिंह, डॉ. नरेश शर्मा, डॉ. भगवान दास आदि ने भी व्याख्यान दिए।