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Panwari kand: बाहरी तत्वों ने गांव की शांत फिजा में घोला था जहर, लोगों में किसी तरह का बैर नहीं

Sat, 06 Aug 2022 12:20 PM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, आगरा

सार

पनवारी कांड में फैसला आने के बाद अमर उजाला की टीम ने गांव के लोगों से बात की, तो उन्होंने कहा कि हर वर्ग के लोगों में मेलजोल है। शादियों में भी सहयोग करते हैं। 
 
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पनवारी कांड - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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गांव की बेटी की शादी थी। हर वर्ग के लोग सहयोग कर रहे थे। अपने-अपने मोहल्ले में बरात चढ़ाई होती थी। मगर, बाहर के लोगों ने आकर गांव की शांत फिजा में जहर घोल दिया। गांव के लोगों में किसी तरह का बैर नहीं है। आज भी सभी मिलजुल कर रहते हैं। पनवारी कांड में फैसला आने के बाद अमर उजाला की टीम ने गांव के लोगों से बात की, इस पर उनका यही कहना था।
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कृषि विभाग से सेवानिवृत्त हुए गांव के करतार सिंह बताते हैं कि 32 साल पहले चोखेलाल की बेटी की शादी थी। बरात चढ़ाई को लेकर विवाद शुरू हुआ था। घटना से दस दिन पहले गांव में पंचायत हुई थी। इसमें किसी तरह का विवाद खड़ा नहीं करने पर बात हुई लेकिन बात नहीं बन सकी। इसके बाद गांव के ही समाज के दो युवकों को जगदीशपुरा क्षेत्र में बंधक बना लिया गया। जब गांव के लोगों को इस बारे में पता चला तो तनाव फैल गया। पुलिस ने किसी तरह दोनों को बंधन मुक्त कराया था।

इसके बाद भी तनाव बढ़ता चला गया। गांव में बाहरी लोगों का आना-जाना बढ़ गया। इससे पहले कभी किसी जाति के लोगों के बीच झगड़ा नहीं हुआ था। सभी शांति चाहते थे। पनवारी के लोगों ने तब पूरी तरह से संयम बरता था। किसी का कोई झगड़ा नहीं हुआ था। बाहर से आए लोग ही बवाल करके चले गए।

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बवाल के कुछ दिन तक तनाव रहा

32 साल पहले गांव की आबादी तीन हजार के आसपास थी। अनुसूचित जाति के लोगों की संख्या 500 थी। जाट दो हजार थे। बाकी अन्य लोग थे। सभी मिलजुल कर रहते थे। एक-दूसरे के परिवारों का सहयोग करते थे। बवाल के कुछ दिन तक तनाव रहा। मगर, बाद में हालत सुधरने लगे। अब फिर कभी कोई झगड़ा नहीं हुआ।
महेश चंद, गांव पनवारी

गांव के लोग पूरा सहयोग करते

गांव में सभी परिवार एक दूसरे का सहयोग करते हैं। तब कोई विवाद नहीं था। अनुसूचित जाति के लोगों के दो परिवार हैं। उनके परिवार का गांव के लोग पूरा सहयोग करते हैं।
अनूपा देवी, ग्राम प्रधान


चोखेलाल के घर की सिर्फ दीवार बची

हाईवे से दो किलोमीटर अंदर पनवारी गांव है। गांव में ट्रांसफार्मर के पास चोखेलाल का मकान था। गांव के भूपेंद्र ने बताया कि उसके पिता पप्पू चोखेलाल के परिवार से हैं। पिता ने ही गांव में हुए बवाल के बारे में उन्हें बता रखा है। चोखेलाल का एक कमरा था। इसके आगे छप्पर पड़ा था। बवाल हुआ तो चोखेलाल परिवार सहित गांव से चले गए। लौटकर नहीं आए। कुछ ही दिन में उनके घर का कमरा भी टूट गया। अब उनके घर की जगह पर दीवार ही नजर आती है।

परिवार को फैसले की नहीं जानकारी

गांव में अनुसूचित जाति के दो परिवार रहते हैं। कोर्ट में पनवारी कांड को लेकर हुए फैसले की जानकारी अनुसूचित जाति के लोगों को नहीं थी। शुक्रवार दोपहर को सन्नाटा पसरा था। गांव की गलियों में घरों के बाहर कुछ ही लोग बैठे थे। गांव की सोनो देवी का कहना था कि गांव में सभी परिवार मिलजुल कर रहते हैं। शादी ब्याह में गांव के बुजुर्गों का सहयोग लिया जाता है।

पनवारी कांड मामले के फैसले के बाद 

भीमनगरी आयोजन समिति केंद्रीय कमेटी के 15 साल से मुख्य सचिव पद पर रहे धर्मपाल सिंह ने कमेटी से इस्तीफा दे दिया। धर्मपाल सिंह ने बताया कि पनवारी कांड में भीमनगरी केंद्रीय कमेटी के संरक्षक करतार सिंह भारतीय की गवाही ने समाज की पीठ में छुरा घोंपा है। उनके साथ काम करना मुश्किल है, इसलिए उनके साथ डॉ. रेखा कुमारी, महेंद्र सिंह सरस, नवल किशोर, चौ. कमल सिंह ने सामूहिक इस्तीफा दे दिया है। उन सभी का अब केंद्रीय कमेटी भीमनगरी से कोई लेना देना नहीं। पनवारी कांड को लेकर जाटव महापंचायत समाज की आवश्यक बैठक जल्द बुलाएगी, जिसमें आगामी रणनीति पर विचार होगा।
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