केंद्र एवं राज्य सरकार हर एक व्यक्ति को सुरक्षा उपलब्ध नहीं करा सकती है। जो लोग हादसा चुपचाप देखते रहते हैं, उनके जमीर को जगाने की जरूरत है। अगर समाज मजबूत हो जाए तो मेरे साथ जो हादसा हुआ, वैसी घटना फिर नहीं घटेगी।
ये बातें एक पैर कृत्रिम होने के बाद भी एवरेस्ट की चोटी पर चढ़ने वाली पद्मश्री अरुणिमा सिन्हा ने फिरोजाबाद में पत्रकारों से बातचीत में कही। कहा कि मेरे साथ हादसा हुआ, उसके दो साल बाद ही मैने दुनिया की सबसे ऊंचे पर्वत को फतह कर लिया था।
मैंने अपने जख्मों को कुरेदा और एवरेस्ट पर चढ़ने गई। वह जख्म मेरे लिए फायदेमंद रहे। उन्होंने कहा कि आजकल कोई लक्ष्य को निर्धारित नहीं करता। सबसे पहले लक्ष्य को निर्धारित करना चाहिए।