कासगंज। जिले में धान की खेती की तैयारियां जोर-शोर से शुरू हो गई हैं। इस वर्ष लगभग 20 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की बुवाई का लक्ष्य रखा गया है। कृषि विभाग ने किसानों को विशेष रूप से बासमती धान की प्रजातियां तैयार करने की सलाह दी है, जिससे उन्हें कम लागत में अधिक मुनाफा मिल सके।
जिला कृषि अधिकारी डॉ. अवधेश मिश्र ने बताया कि रबी और जायद फसलों से खाली हुए खेतों में किसान अब खरीफ की फसलें जैसे धान, मक्का और बाजरा लगाने की तैयारी कर रहे हैं। जनपद में सर्वाधिक क्षेत्रफल में बासमती धान की खेती की जाती है, जो किसानों के लिए बेहद लाभकारी सिद्ध होती है। डॉ. मिश्र ने बताया कि बासमती चावल की कीमत सामान्य चावल की तुलना में 2 से 2.5 गुना अधिक होती है।
उन्होंने किसानों को ऐसी प्रजातियों का चयन करने की सलाह दी जो उच्च गुणवत्ता के साथ-साथ रोग रहित हों और अधिक उत्पादन देने की क्षमता रखती हों। कृषि विभाग द्वारा पूसा बासमती 1985, 1847, 1692, 1885, 1886, 1509 और 1718 जैसी उन्नत प्रजातियों की सिफारिश की गई है। ये सभी प्रजातियां जनपद के सभी राजकीय बीज भंडारों पर उपलब्ध हैं, जिससे किसान आसानी से इन्हें प्राप्त कर सकते हैं। इन प्रजातियों का चयन कर किसान धान की खेती से बेहतर उपज और अधिक आय प्राप्त कर सकते हैं।