12 घंटे की ड्यूटी के बाद भी पीएसी कर्मियों के लिए सुविधाओं का अभाव है। कर्मियों की कैंप में तैनाती के दौरान न तो कमरे की व्यवस्था है और न ही विभाग की ओर से राशन का इंतजाम। कैंप में भी खाना उन्हें 45 से 50 रुपये जेब से खर्च करने के बाद ही मिल पाता है। इसके अलावा सर्दी हो या गर्मी या फिर बरसात, कभी टिनशेड तो कभी एक तंबू के नीचे ही रात गुजारनी पड़ती है।
अभी हाल ही में बीएसएफ के एक जवान का सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हुआ था। जवान ने ड्यूटी के हालातों को बयां किया था। इधर, पीएसी की बात करें तो कर्मियों के लिए सुविधाओं की कमी है। आगरा में चार स्थानों पर पीएसी के कैंप हैं। इनमें एक सेंट्रल जेल, दूसरा मंडी समिति, तीसरा दीवानी परिसर और चौथा बाह के गांव विक्रमपुर में है। एक कर्मी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उनको अक्सर दो-दो महीने के लिए एक जिले से दूसरे जिले में ड्यूटी करनी पड़ती है। कैंप में ड्यूटी के दौरान उनको राशन के लिए खुद ही पैसा खर्च करना पड़ता है। एक दिन के भोजन के लिए तकरीबन 45 से 50 रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं। टेंट और टिनशेड के नीचे सामान के साथ रहना पड़ता है। सर्दी के मौसम में गर्म कपड़े भी घर से लाने होते हैं। विभाग की ओर से इसकी कोई व्यवस्था नहीं है। खाना भी कभी पेड़ के नीचे तो कभी जर्जर कमरों में बनाना पड़ता है।
एडवांस में देने पड़ते हैं 2500 रुपये
ड्यूटी ज्वाइन करने के दौरान पीएसी कर्मी को पहली बार में 2500 रुपये जमा करने होते हैं। जब किसी कैंप पर कर्मी को तैनात किया जाता है तब भोजन पर होने वाले खर्च को इस रकम से काट लिया जाता है। ऐसा प्रत्येेक महीने होता है।
शौचालय तक की व्यवस्था नहीं
मंडी समिति में पीएसी को रोका गया है। यहां पर एक टिनशेड के नीचे सभी सिपाही रह रहे हैं। सर्द मौसम में चारों तरफ हवा रोकने तक का भी कोई इंतजाम नहीं है। कर्मचारियों के लिए शौचालय तक की उचित व्यवस्था नहीं है। एक शौचालय है उस पर ताला लगा है। पीएसी कर्मियों को मंडी समिति के गेट के पास बने शौचालय में जाना पड़ता है। यह कैंप से तकरीबन 400 मीटर की दूरी पर है।
दो वाहन भी मिलते हैं
पीएसी कर्मियों को एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए एक बस, एक ट्रक और एक छोटा वाहन मिलता है। इससे ही कर्मचारी सामान लेकर जाते हैैं।
खुद ही बनाते हैं मीनू
खाने के मीनू की बात करें तो कर्मचारी खुद ही बनाते हैं। इसमें सुबह दाल, सब्जी, चावल, रोटी, सलाद रहती है, जबकि शाम को सिर्फ दाल और रोटी रहती है। नाश्ते की कोई व्यवस्था नहीं हो पाती है।
मिलता है मैस मैनेजर और कुक
15वीं बटालियन के कमांडेंट डा. मनोज कुमार ने बताया कि कैंप के दौरान पीएसी कर्मियों को मैस मैनेजर और कुक दिए जाते हैं। कर्मचारी अपनी इच्छा से मैस मैनेजर को चुनते हैं। उन्हें बदला भी जा सकता है। मैस मैनेजर सप्ताह का मीनू बनाकर खाना कर्मी की इच्छा अनुसार बनवाते हैं। ज्यादातर इलाकों में पीएसी को पुलिस के सहयोग से स्कूल परिसर आदि में रोका जाता है, जिससे उन्हें कमरा, शौचालय आदि मिल सके। जहां कमरा नहीं मिल पाता है वहां पर उचित प्रबंध करके कैंप लगाया जाता है। किसी भी कर्मी को दिक्कत नहीं होने दी जाती है। टीवी के लिए डिश टीवी कनेक्शन और अखबार की भी व्यवस्था रहती है। पीएसी में कर्मचारी मैस का खर्च खुद करते हैं। राशन देने की व्यवस्था नहीं है। इसके लिए एडवांस में मैस खर्च की रकम जमा रहती है।