ओजोन की परत को सुरक्षित रखने वाली तकनीकी पर मंथन के लिए साउथ एशिया नेशनल ओजोन आफिसर्स नेटवर्क की वार्षिक बैठक ताजनगरी के आईटीसी होटल में शुरू हुई। यूनाइटेड नेशन एनवायरमेंट और भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय साथ मिलकर 23-26 मई तक चार दिवसीय बैठक कर रहे हैं, जिसमें दक्षिण एशिया के 13 देशों के 85 अधिकारी हिस्सा ले रहे हैं।
चार दिनी बैठक और पहली बार हुए ओजोन टू क्लाइमेट टेक्नोलोजी रोड शो का उदघाटन पर्यावरण मंत्रालय के सचिव अजय नारायण झा ने किया। उन्होंने कहा कि मांट्रियल प्रोटोकॉल में किगली संशोधन के बाद दुनिया ने उन तकनीक पर ध्यान दिया है जो ओजोन लेयर को सुरक्षित रख सकें। ग्लोबल वार्मिंग को बढ़ावा देने वाली तकनीक खासकर रेफ्रि जरेशन और एयर कंडीशनिंग को हटाना होगा।
नई तकनीक पर्यावरण के अनुकूल, सुरक्षित और बाजार के लिए व्यवहारिक होनी चाहिए। मांट्रियल प्रोटोकॉल को 30 साल हो चुके हैं, यह ओजोन परत की सुरक्षा के लिए मील का पत्थर है। भारत ने साल 2014 में संशोधन के जरिए हाइड्रो क्लोरो फ्लोरो कार्बन्स (एचसीएफसी) को तेजी से फेज आउट करने का संकल्प दोहराया है।
बैठक में पर्यावरण मंत्रालय के संयुक्त सचिव मनोज कुमार सिंह, यूएनडीपी के कंट्री डायरेक्टर जेको सीलर्स, ओजोन एक्शन की हेड शमिला नैयर, यूएन एनवायरमेंट के क्षेत्रीय निदेशक डा. डेकन शेरिंग, एक्जीक्यूटिव सेक्रेटरी टीना बिरम्पिली, चीफ आफिसर एडुवर्डो गोरेन, सीनियर नेटवर्क कार्डिनेटर अतुल बगाई आदि मौजूद रहे।