एसएन मेडिकल कॉलेज का कोविड वार्ड
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होम आइसोलेशन में रहे संक्रमित मरीजों में ब्लैक फंगस के ज्यादा मामले मिले हैं। एसएन में भर्ती 66 मरीजों में आधे से ज्यादा ऐसे ही मरीज हैं। ओवर स्टीम लेने, घरों पर इंडस्ट्रियल ऑक्सीजन के प्रयोग से भी ब्लैक फंगस के मरीज बढ़े हैं।
एसएन मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग के डॉ. विकास गुप्ता ने बताया कि होम आइसोलेशन में रहे लोगों ने चित्सिकीय परामर्श के बिना दवाएं, ऑक्सीजन और भाप ली है। दवाओं के ओवरडोज से यह दिक्कत हुई। पूछताछ में पाया कि मरीजों ने भाप पांच से छह बार ली और उसका ताप भी अधिक रहा। लंबे समय तक ऐसा करने से फंगस पनपा। इंडस्ट्रियल ऑक्सीजन सिलिंडर का फ्लो अधिक होने और प्लांट में साफ-सफाई न होने से उनमें फंगस भी लगा, जिन मरीजों को मधुमेह था, उनमें ब्लैक फंगस का खतरा ज्यादा रहा।
होम आइसोलेशन वाले मरीज ज्यादा प्रभावित
ब्लैक फंगस वार्ड के प्रभारी डॉ. अखिल प्रताप सिंह ने बताया कि एसएन में अभी ब्लैक फंगस के कुल 66 मरीज हैं। इनमें आधे से अधिक मरीज ऐसे हैं, जो संक्रमित होने पर होम आइसोलेशन में रहे। ब्लैक फंगस के मामलों में म्यूटेट वायरस के अलावा ओवरडोज दवाओं का भी असर रहा।
इनका रखें ध्यान
- दिन में दो बार ही भाप लें।
- मशीन का ताप सामान्य रखें।
- डॉक्टरी परामर्श पर जिंक-आयरन की गोलियां लें।
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