यमुनापार के सील किए गए अनाथालय की कार्यकारिणी के पदाधिकारी और सदस्यों के नामों की सूची पुलिस को मिल गई है। इसमें पांच पदाधिकारी और 15 सदस्यों के नाम हैं।
डीपीओ ने पुलिस को जो कार्यकारिणी पदाधिकारी और सदस्यों के नाम लिखा पत्र सौंपा है, उसमें कार्यकारिणी गठित होने की तारीख 29 सितंबर है। युवती के आश्रम से कूदने की घटना से चार दिन पहले कार्यकारिणी के गठन से सवाल भी खड़े हो रहे हैं। पुलिस का कहना है कि कार्यकारिणी गठन की जांच कर सभी के नाम मुकदमे में शामिल किए जाएंगे। इसके बाद कार्रवाई होगी।
तीन अक्तूबर को अनाथालय की छत से युवती ने यमुना में छलांग लगा दी थी। वह बच गई थी। उसने तीन युवकों पर दुष्कर्म का आरोप लगाया था। इसमें एक आरोपी अनाथालय का रसोइया था तो दूसरा सफाई कर्मचारी था। तीसरा अनाथालय में ही रहता है। पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
थाना प्रभारी निरीक्षक उदयवीर मलिक ने बताया कि अनाथालय के मामले में जेजे एक्ट में मुकदमा दर्ज किया गया था। इसमें बच्चों के साथ उपेक्षापूर्ण व्यवहार और बिना पंजीकरण अनाथालय चलाने का आरोप है। इसमें अध्यक्ष मान सिंह परमार सहित अन्य पदाधिकारी और सदस्यों को आरोपी बनाया गया।
पुलिस से मिली सूची के मुताबिक, अनाथालय की कार्यकारिणी में प्रधान मान सिंह परमार, उप प्रधान राधे श्याम सारस्वत, मंत्री रमेश यादव, सहमंत्री अभिषेक मोहन झा, कोषाध्यक्ष प्रदीप सारस्वत, पदेन सदस्य सुरेश बाबू शर्मा, सदस्य ललित मोहन दुबे, बृजराज सिंह परमार, गोपाल प्रसाद अग्रवाल, डॉ. रामबाबू अग्रवाल, विजय पाल सिंह चौहान, कन्हैयालाल, दौलतराम गोयल, राकेश मोहन दुबे, वीरपाल सिंह परमार, राजकुमारी सिंघल, आशा गुप्ता है। इनके अलावा विशेष आमंत्रित सदस्य डॉ. महेश बघेल, भंवर सिंह और डॉ. अनिल मित्तल हैं। पुलिस को मिले पत्र में सुरेश बाबू शर्मा के हस्ताक्षर भी हैं।