मैनपुरी। शहर के मोहल्ला खरगजीत नगर में स्थित ऋषि आश्रम में क्षेत्रीय महिलाओं और आश्रम समिति के बीच गुरुवार को रार हो गई। भागवत कथा के लिए लगाया गया लाउड स्पीकर हटाने और कमरों के ताले न खोले जाने से गुस्साई महिलाओं ने जमकर नारेबाजी की। साथ ही मौके पर पहुंचे समिति के उपाध्यक्ष का घेराव किया।
जानकारी होने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को संभाला। पुलिस के समझाने पर आयोजक मंडल ने नए सिरे से सामान की व्यवस्था करके भागवत कथा शुरू कराई। ऋषि आश्रम में हर वर्ष इच्छा नवमी पर स्थानीय लोगों द्वारा भागवत कथा का आयोजन कराया जाता है।
बुधवार को विधिवत भागवत कथा का कलश स्थापना के साथ शुभारंभ हो गया। आरोप है कि गुरुवार सुबह जब आश्रम के अध्यक्ष व अन्य को इस संबंध में जानकारी मिली तो उन्होंने आश्रम पहुंचकर यहां लगे लाउड स्पीकर आदि हटवा दिए। इस पर आयोजन समिति की महिलाएं मौके पर पहुंच गईं और नारेबाजी करने लगीं।
इस दौरान महिलाओं ने यहां पहुंचे आश्रम की शिक्षा सुधार समिति के उपाध्यक्ष एडवोकेट देवेंद्र सिंह का घेराव कर लिया। महिलाएं मांग कर रहीं थीं कि उन्हें आश्रम के भंडार कक्ष की चाबी दिलवाई जाए, जिससे कि वे भागवत के लिए सामान निकलवा सकें। जब उन्होंने चाबी अध्यक्ष के पास होने की बात कही तो महिलाओं ने नारेबाजी शुरू कर दी।
मौके पर पहुंची कोतवाली पुलिस ने आश्रम के अध्यक्ष से फोन पर बात की तो उन्होंने चाबी देने से मना कर दिया। इसके बाद महिलाओं ने अपने घरों से सामान लाकर तथा फिर से माइक मंगाकर भागवत कथा शुरू करा दी।
इन्होंने किया विरोध
इस दौरान आयोजन समिति की अध्यक्ष विमला मिश्रा, एडवोकेट सीमा शुक्ला, विमलेश मिश्रा, आशा मिश्रा, रीता यादव, मीनेश मिश्रा, सत्यवती श्रीवास्तव, कमलेश मिश्रा, मुन्नी चौहान, मुन्नी गुप्ता, बोबी पांडेय, अनीता देवी, मीना देवी, सुनीता देवी, हेमलता, पप्पी चौहान, उर्मिला, पूनम, मामलती देवी, कमलेश चौहान, विमलेश चौहान आदि महिलाएं शामिल रहीं।
तीन घंटे तक मौके पर डटीं रहीं महिलाएं
कथा में खलल पर गुस्साई महिलाएं मौके पर पहुंच गई। इसके बाद उन्होंने नारेबाजी शुरू कर दी। जब आश्रम समिति ने भंडार कक्ष व अन्य कमरों की चाबी नहीं दी तो उनका पारा और चढ़ गया। इस दौरान करीब तीन घंटे तक महिलाएं मौके पर डटीं रहीं।
70 वर्षों से होता आ रहा है आयोजन
आयोजन समिति की अध्यक्ष विमला मिश्रा का कहना था कि ऋषि आश्रम में 70 वर्षों से स्वामी नारदानंद सरस्वती गुरु महाराज की याद में वर्ष में दो बार भागवत कथा का आयोजन होता आ रहा है। कई बार भागवत कथा के आयोजन के दौरान पड़ोस में ही लोगों की मृत्यु हुईं, कथा के बीच में भी लोगों की मृत्यु हुईं, लेकिन कथा बंद नहीं हुई।
इस बार आश्रम के पदाधिकारी 70 वर्षों से चली आ रही परंपरा को तोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। वह आश्रम समिति के मंत्री के पिता की मृत्यु होने का तर्क दे रहे हैं। एडवोकेट सीमा शुक्ला का कहना था कि नई समिति ने आश्रम में चल रही गोशाला को भी बंद कर दिया है। साथ ही आश्रम की रसोई बंद रहती है।
भागवत कथा हर वर्ष होती आ रही है। इस वर्ष आश्रम समिति के मंत्री के पिता की मृत्यु के कारण समिति ने भागवत कथा को पांच नवंबर से कराने का निर्णय लिया था। कुछ लोगों ने महिलाओं को भड़काने का कार्य किया है। पहले ये कथा इच्छा नवमी को खत्म होती थी, इस वर्ष इच्छा नवमी से शुरू कराने की बात तय की गई थी।
-रामबाबू कुशवाह, अध्यक्ष शिक्षा सुधार समिति।
भंडारगृह में ताला लगाने का महिलाएं विरोध कर रही थीं। समिति के पदाधिकारियों ने कहने के बाद भी ताला नहीं खोला। बाद में दूसरी जगह से जरूरी सामान की व्यवस्था कराकर भागवत कथा शुरू करा दी गई।
-ओमहरि वाजपेयी, इंस्पेक्टर कोतवाली।