ताजमहल को अग्रेश्वर नाथ महादेव नागेश्वर विराज मंदिर बताकर इसके बंद हिस्सों को खुलवाने की याचिका आगरा सिविल कोर्ट ने खारिज कर दी। लखनऊ के अधिवक्ता हरीशंकर जैन ने सार्वजनिक संपत्ति कहकर ताजमहल के रहस्यों से पर्दा उठाने के लिए लोकहित याचिका दायर की थी। अधिवक्ता इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर करने की तैयारी में हैं।
याचिका में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) और केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय को पक्षकार बनाया गया था। याचिका में अधिवक्ता ने कहा कि 11वीं शताब्दी में जयपुर के राजा जय सिंह ने मंदिर का निर्माण कराया था, जिस पर बाद में मुगलों ने कब्जा कर इसे ताजमहल का नाम दे दिया। इसका अंदरूनी हिस्सा बंद कर दिया गया है, जबकि यह सार्वजनिक संपत्ति है। याचिका में ताजमहल के चार मंजिल तक के बंद हिस्सों को खोलने का आदेश पारित करने की गुहार की। अधिवक्ता ने पुरातत्व अधिनियमों का हवाला भी दिया, लेकिन सिविल कोर्ट ने इस याचिका को लोकहित याचिका नहीं माना और खारिज कर दिया है। इस मामले में आगरा के अधिवक्ता राजेश कुलश्रेष्ठ और माधो सिंह एडवोकेट ने पैरवी की थी। अधिवक्ताओं के मुताबिक, इस मामले में कोर्ट के फैसले के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की जाएगी।