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मानसून में इस जानलेवा खतरे से सावधान: सड़कों पर खुले मैनहोल और गहरे गड्ढे, जूता कारखाना संचालक की हुई थी माैत

Tue, 07 Jul 2026 11:45 AM IST
Arun Parashar संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा

सार

आईएसबीटी से खंदारी चौराहे के बीच ऐसे चैंबर की संख्या 10 से ज्यादा है जो ढके नहीं गए हैं। नेशनल हाईवे पर नाले के खुले पड़े चैंबर भी लोगों के लिए जानलेवा साबित हो सकते हैं। इस ओर संबंधित विभाग की ओर से कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। 
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खुले पड़े मैनहोल और गड्ढे। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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मानसून आ चुका है। शहर की सड़कों पर जलभराव के दौरान मैनहोल नजर आएंगे और न ही खुदाई के बाद छोड़े गए गहरे गड्ढे, ऐसे में देखकर ही चलें। नगर निगम, मेट्रो और नेशनल हाईवे समेत कार्यदायी एजेंसियां और विभाग खुले पड़े गड्ढों और नालों के मैनहोल को अब तक ढक नहीं पाए हैं। लगातार हादसों के बाद भी शहर की सड़कों और फुटपाथ पर खुले छोड़े गए गहरे गड्ढे बारिश में जलभराव होने पर जानलेवा साबित हो सकते हैं।
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एमजी रोड पर दीवानी चौराहे के सामने कांजी हाउस से सटे दो मैनहोल खुले पड़े हैं। भूमिगत नाले में प्लास्टिक कचरा भरा पड़ा है और यहां से हर दिन सैकड़ों लोग निकलते हैं। इसी तरह सिकंदरा के निर्माणाधीन मेट्रो स्टेशन के पास रेन वाटर हार्वेस्टिंग के लिए 6 से 8 फीट गहरा चैंबर बनाया गया है लेकिन एक महीने से इसके ऊपर कोई कवर नहीं रखा गया और ही इसके पास कोई बैरिकेडिंग की गई है। आईएसबीटी से खंदारी चौराहे के बीच ऐसे चैंबर की संख्या 10 से ज्यादा है जो ढके नहीं गए हैं। नेशनल हाईवे पर नाले के खुले पड़े चैंबर भी लोगों के लिए जानलेवा साबित हो सकते हैं।

 
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मैनहोल में गिरकर हुई मृत्यु पर मानवाधिकार आयोग ने मांगा जवाब
अलबतिया रोड, शाहगंज क्षेत्र के शंकरगढ़ पुलिया पर बीते साल 7 जनवरी की रात 8:15 बजे जूता कारखाना संचालक राजेश कुमार की मौत खुले पड़े नाले के मैनहोल में गिरने से हो गई थी। वह दौरेठा अपने स्कूटर से जा रहे थे कि अगला पहिया नाले की सफाई के लिए छोड़े गए मैनहोल में फंस गया, जिससे गिरने पर राजेश कुमार के सिर में चोट आई और उनकी मृत्यु हो गई थी। इस मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने नगर निगम से जवाब मांगा है। निगम से आयोग ने पूछा है कि मृतक राजेश कुमार के परिजन को नौकरी, मुआवजा आदि कोई सहायता उपलब्ध कराई गई है या नहीं।

बारिश में सड़कें पानी में डूबे होने से खुले पड़े मैनहोल और खोदकर छोड़े गए गड्ढे नजर नहीं आएंगे। नगर निगम जून में ही अभियान चलाकर इन्हें ढकता था, लेकिन इस बार सैकड़ों मैनहोल और गड्ढे खुले पड़े हैं, जिन्हें ढका नहीं गया। -रवि माथुर, पार्षद

हाईवे पर 20 से ज्यादा गड्ढे खुले छोड़ दिए गए हैं। हादसों के बाद भी नगर निगम, एनएचएआई और मेट्रो ने सबक नहीं लिया है। किसी की जान जाएगी, उसके बाद ही एक दूसरे पर ठीकरा फोड़ेंगे। -मुकेश यादव, पूर्व पार्षद

नगर निगम क्षेत्र में ऐसे मैनहोल और गड्ढों की जांच करा ली जाएगी, जो खतरनाक ढंग से खुले पड़े हैं। इन्हें तत्काल कवर कराया जाएगा। -शिशिर कुमार, अपर नगर आयुक्त
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