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Taj Mahal: सातवें अजूबे का मिला सम्मान, 19 साल में चार गुना बढ़ गए पर्यटक; फिर भी स्मारक पर नाकाफी इंतजाम

Tue, 07 Jul 2026 11:18 AM IST
Arun Parashar संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा

सार

ताजमहल देखने के लिए आने वाले पर्यटकों की संख्या 80 लाख तक पहुंच गई है। विदेशी सैलानियों और बच्चों को मिलाकर करीब एक करोड़ पर्यटक ताज पर आ रहे हैं। बावजूद इसके स्मारक पर अव्यवस्थाओं के चलते पर्यटकों को दिक्कत का सामना करना पड़ता है।
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ताजमहल। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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19 साल पहले 07-07-07 यानी सात जुलाई 2007 को पुर्तगाल में ताजमहल को दुनिया के नए सात अजूबों में नंबर 1 का सम्मान दिया गया था। आगरा की तत्कालीन मेयर अंजुला सिंह माहौर को इसकी ट्रॉफी सौंपी गई थी, जिसे पहले ताज में फिर पालीवाल पार्क स्थित म्यूजियम में रखवाया गया। इन 19 वर्षों में ताज पर चार गुना पर्यटक बढ़ गए, लेकिन उनके लिए व्यवस्थाओं और सुविधाओं में कोई बदलाव नहीं हो सका है।
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न्यू सेवन वंडर्स फाउंडेशन की ओर से 19 साल पहले सात अजूबों की घोषणा के लिए वोटिंग की गई थी। इसमें ताजमहल नंबर 1 चुना गया। दुनियाभर के 200 स्मारकों के बीच तब वोटिंग हुई थी, हालांकि इसे यूनेस्को ने आधिकारिक तौर पर मंजूरी नहीं दी, लेकिन इसने दुनियाभर में ताजमहल को जबरदस्त प्रचार दिया। तब ताजमहल में प्रतिवर्ष 18 लाख तक सैलानी आते थे लेकिन घोषणा के 19 साल बाद पर्यटकों की संख्या 80 लाख तक पहुंच गई है। विदेशी सैलानियों और बच्चों को मिलाकर करीब एक करोड़ पर्यटक ताज पर आ रहे हैं।

 

सुविधाओं में नहीं हुई बढ़ोतरी
ताजमहल में केवल विदेशी पर्यटकों को शू-कवर और पानी की बोतल देने की व्यवस्था है, जबकि वर्ष 2007 से अब तक ताज की टिकट दर में ढाई गुना इजाफा हो चुका है। भारतीय पर्यटकों को भी पानी की बोतल और शू-कवर देने की मांग पर्यटन उद्यमी राकेश चौहान उठा रहे हैं। उनके मुताबिक पथकर से 60 करोड़ रुपये लेकर भी एडीए पर्यटकों को सुविधा नहीं दे रहा है।

 

कतार कम नहीं हुईं, चेकिंग में भी देरी
टूरिज्म गिल्ड के पूर्व अध्यक्ष राजीव सक्सेना के मुताबिक ताजमहल के न्यू सेवन वंडर्स में शुमार होने का जबरदस्त प्रचार होने से पर्यटक बढ़े, लेकिन ताज के प्रवेश द्वार पर घंटों तक चेकिंग, टिकट की समस्या बरकरार है। सुरक्षा जांच कतारें बढ़ाई गईं, न ही चेकिंग में लगने वाला समय कम हुआ। टिकटों के लिए बुकिंग विंडो पर हर दिन मारामारी नजर आती है।

 
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स्टेप टिकट के साथ खोलें असली कब्रें
होटल एसोसिएशन के संदीप अरोरा के मुताबिक जिस तरह मुख्य मकबरे के लिए 200 रुपये का शुल्क लगाया गया है, उसमें असली कब्रों को भी दिखाया जाए, जिससे पर्यटकों के लिए आकर्षण बढ़े। उर्स में तीन दिन खुलने पर लोग असली कब्रों को देखने के लिए उमड़ पड़ते हैं। स्टेप टिकट से हर दिन केवल एक से दो हजार पर्यटक ही मकबरे पर पहुंचते हैं।
 
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