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मौत दे रहे ये नाले: पांच साल में 20 लोगों की चली गई जान, बारिश में बढ़ जाता है खतरा; सो रहे हैं जिम्मेदार

Fri, 21 Aug 2026 09:41 AM IST
Dhirendra Singh संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा

सार

आगरा में खुले और गहरे नाले बारिश के दौरान जानलेवा बन रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार बीते पांच साल में नालों में गिरने से 20 लोगों की जान जा चुकी है। शहर के 410 छोटे-बड़े नालों में कई 20 फीट तक गहरे हैं, जबकि जलभराव के दौरान सड़क और नाले का अंतर खत्म होने से हादसे का खतरा बढ़ जाता है।
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ये हैं मौत के नाले - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बारिश का पानी निकालने के लिए बनाए गए नाले जिम्मेदारों की लापरवाही से जानलेवा साबित हो रहे हैं। खुले और बदबूदार नाले बीते पांच वर्षों में 20 लोगों की जान ले चुके हैं। 20 फीट तक गहरे और खुले पड़े नाले सीधे तौर पर मौत के कुएं बन चुके हैं। कोई घर के सामने खेलते हुए गिरा तो कोई बाजार से लौटते हुए।
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हर बारिश में खुले नालों का खौफनाक मंजर उन लोगों को डराता है जो गिरने के बाद जैसे-तैसे बच सके। राजपुर चुंगी पर पांच बाइक सवारों के डबल पेट्रोल पंप नाले में गिरने की घटना के बाद नालों को ढकने की मांग तेज हो गई है। अमर उजाला उन लोगों की आवाज बन रहा है जो इन्हें ढकने की मुहिम से जुड़ रहे हैं।

 

चोक पड़े गहरे नाले में गिरकर हाल में ही सुभाष बाजार में गंगा देवी की माैत हो गई थी। शहर में 410 छोटे-बड़े नाले हैं जिनमें बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं के गिरने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। मंटोला, महावीर नाला, भैंरो नाला समेत 18 नाले 20 फीट तक गहरे हैं। बारिश में पानी में डूबी सड़कों और नालों के बीच का फर्क खत्म हो जाता है और लोग हादसे का शिकार हो जाते हैं। राजपुर चुंगी और सुभाष बाजार जैसे हादसे अफसरों की संवेदनहीनता बयां करते हैं। हादसों के शिकार लोगों का कहना है कि इन नालों को आरसीसी स्लैब या लोहे के जाल से ढका नहीं गया तो और जिंदगियां जाएंगी।


 

पार्षदों ने भी उठाई मांग
भाजपा पार्षद दल के उपनेता प्रकाश केसवानी ने कहा कि नालों में गिरकर कई जानें जा चुकी हैं। गहरे नालों को सबसे पहले ढका जाए। ये जानलेवा साबित हो रहे हैं। वहीं बसपा पार्षद दल के नेता कप्तान सिंह ने बताया कि राजपुर चुंगी पर जिस तरह से बाइक सवार गिरे, उसे देखते हुए गहरे नाले तत्काल ढके जाएं। नगर निगम में इसका प्रस्ताव लाएंगे। 

 

स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा बुरा प्रभाव
नालों के किनारे शहर के पांच लाख से ज्यादा लोग रह रहे हैं। एसएन मेडिकल कॉलेज के डॉ. यतेंद्र चाहर ने बताया कि खुले नालों के किनारे रहने वाले लोगों को त्वचा रोग के साथ सीवर के कारण उठने वाली दुर्गंध से सांस संबंधी दिक्कतें हो जाती हैं। क्यूलेक्स मच्छरों के काटने से एलर्जी, संक्रामक रोग का भी खतरा रहता है।

 
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आंकड़ों पर एक नजर
- 410 छोटे-बड़े नाले हैं शहर में
- 05 लाख लोग नालों के किनारे रह रहे

- 18 बड़े नाले हैं
- 34.800 किमी. है बड़े नालों की लंबाई

- 251 मंझले नाले शहर में
- 207 किमी. मझले नालों की लंबाई

- 141 छोटे नाले शहर में
- 92.650 किमी. है छोटे नालों की लंबाई

- 334.450 किमी. है शहर में नालों की कुल लंबाई
- 16 किमी. नाले ही भूमिगत
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