लोक निर्माण विभाग के राज्य मंत्री समीक्षा बैठक करते हुए
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आगरा के सर्किट हाउस में शुक्रवार को हुई समीक्षा बैठक में रेणुकाधाम पुल के कार्य में लापरवाही पर लोक निर्माण विभाग के राज्यमंत्री बृजेश सिंह सेतु निगम के अफसरों पर बिफर पड़े। चार साल में महज 35 फीसदी ही पुल बन सका है, जबकि इसे दो साल में बनना था। राज्यमंत्री ने 18 महीने में काम पूरा कर रिपोर्ट मांगी है।
राज्यमंत्री ने वर्ष 2021 में शुरू हुए रेणुकाधाम पुल की अपडेट जानी। सेतु विभाग के अधिकारियों ने बताया कि 35 फीसदी कार्य हो चुका है। पुल निर्माण में करीब 200 पेड़ आ रहे हैं, इनके काटने की अनुमति की प्रक्रिया चल रही है। वन विभाग-रेलवे की एनओसी मिलना भी बाकी है। इस पर मंत्री बिफर गए कि यह स्थिति लंबे समय से बनी हुई है, इसके लिए जरूरी प्रक्रिया तेज क्यों नहीं की गई। उन्होंने डेढ़ साल में पुल निर्माण करते हुए रिपोर्ट भेजने के लिए भी कहा।
मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत उन्होंने 150 लोगों की आबादी वाले गांव-मजरों को भी मुख्य सड़क से जोड़ने का कार्य 15 जुलाई तक पूरा करने के लिए निर्देशित किया। उन्होंने 10 साल से तैनात एई और जेई का तबादला किए जाने की भी बात कही, इसके लिए विभाग से सूची भी मांगी है। उन्होंने अधिकारियों से सड़कों के चौड़ीकरण, गड्ढामुक्त अभियान, नई सड़क और अन्य विकास कार्य की रिपोर्ट भी मांगी है।
पुल बनने से 15 किमी की दूरी होगी कम
रेणुकाधाम पर पुल बनाने का कार्य 2021 में शुरू हुआ था। इसकी लागत 54 करोड़ रुपये है। ये यमुना नदी पर सबसे ऊंचा पुल होगा। इसकी ऊंचाई साढ़े सात मीटर है। यमुना में नौ कुओं पर इसकी नींव रखी जाएगी, इसमें अभी तक 4 कुएं ही बन पाए हैं। ये रुनकता और बल्देव को सीधा जोड़ेगा, जिससे 10-15 किमी की दूरी कम हो जाएगी। इससे आगरा और मथुरा समेत आसपास के जिलों के लाखों लोगों के लिए बड़ी सुविधा हो जाएगी।