अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी के मामले की जांच में खुलासा हुआ कि मास्टरमाइंड विदेशों में है। भारत में एजेंट फैले हैं। मास्टरमाइंड पहले वेबसाइट या एप बनाते हैं। अपनी पहचान छिपाने के लिए ऐसे देश के सर्वर का इस्तेमाल करते हैं, जिसकी भारत के साथ संधि नहीं होती है।
अवैध बेटिंग-गेमिंग साइट व एप से करोड़ों की ठगी के मास्टरमाइंड विदेशों में बैठे हैं। वो पहले वेबसाइट एप तैयार कराते हैं। रकम लेने के लिए भारत में एजेंट के माध्यम से फर्जी खाते खुलवाते हैं। एजेंट इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप पर लिंक भेजकर लोगों को घर बैठे रकम कमाने का लालच देते हैं।
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मास्टरमाइंड 70, एजेंट 27 से 29 और खाताधारक एक से तीन प्रतिशत तक रकम पाते हैं। साइबर सेल ने बताया कि धोखाधड़ी करने वाले मास्टरमाइंड विदेशों में बैठे हैं। वो पहले वेबसाइट या एप बनाते हैं। अपनी पहचान छिपाने के लिए ऐसे देश के सर्वर का इस्तेमाल करते हैं, जिसकी भारत के साथ संधि नहीं होती है। पैसा लेने के लिए एकाउंट की जरूरत होती है।
एकाउंट के लिए मल्टीलेवल मार्केटिंग मॉडल तैयार करते हैं। इसमें हर राज्य और शहर में एजेंट बनाए जाते हैं। चेन सिस्टम की तरह एक से लेकर सैकड़ों की संख्या में एजेंट खाते खोलने का काम करते हैं। मुख्य एजेंट खाते में आने वाली रकम का 27-29 प्रतिशत लेते हैं, जबकि सब एजेंट को इसमें से ही रकम दी जाती है। खाताधारक को 1 से 3 प्रतिशत तक रकम दी जाती है।
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लोगों को इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप पर लिंक भेजे जाते हैं। इसमें घर बैठे पैसा कमाने का झांसा दिया जाता था। एक सप्ताह में खाते से रकम निकाली जाती है। इंस्टाग्राम पर विज्ञापन देने वाला अपना नाम एडम, जार्ज, डेविड बताता है। वह खातों का संचालन अपने पास ले लेता है। इसमें किसी व्यक्ति का आमने-सामने संपर्क नहीं होता है। मास्टरमाइंड 70 प्रतिशत तक रकम लेते हैं।
क्यूआर कोड से लेनदेन
किसी भी ऑनलाइन भुगतान के लिए पेमेंट गेटवे की जरूरत होती है। मगर, अवैध बेटिंग और गेमिंग एप के लिए वर्चुअल एकाउंट बनाया जाता है। क्यूआर कोड से भुगतान लिया जाता है। छह से सात दिन में खाता खाली कर दिया जाता है। इसके बाद बंद हो जाता है।
जामताड़ा और मेवात के गैंग
केवल एप ही नहीं लोगों से अलग-अलग तरीके से साइबर अपराधी ठगी कर रहे हैं। झारखंड के जामताड़ा और हरियाणा के मेवात में सक्रिय साइबर ठग लोगों को कभी कॉल करते हैं तो कभी मैसेज भेजकर ठगी का शिकार बनाते हैं। बैंक अधिकारी, पेंशन बाबू, कंपनी अधिकारी, ग्राहक सेवा प्रतिनिधि, बनकर ठगी करते हैं। पुलिस केस दर्ज कर लेती हैं लेकिन अपराधी नहीं पकड़े जाते हैं।
बेटिंग में लगाकर गवां दिए 70 लाख
साइबर सेल ने जब कड़ी से कड़ी जोड़ने की कोशिश की तो ऐसे लोग भी मिले, जिनके खातों से 70 से 80 लाख रुपये जमा कराए गए थे। शुरुआत में इन लोगों को रकम दी गई थी। मगर, बाद में ज्यादा रकम लगाने पर कोई पैसा नहीं मिला। ऑनलाइन एप चलने के दौरान लगने वाली रकम को भी दिखाया जाता था।
साइबर सेल की सलाह
साइबर सेल के प्रभारी सुल्तान सिंह ने बताया कि लोगों को ऑनलाइन गेमिंग और बेटिंग से बचना चाहिए। मोबाइल पर आने वाले लिंक पर क्लिक नहीं करें। अगर, कोई घर बैठे रुपये कमाने का लालच दे रहा है तो समझ जाएं ठगी होने वाली है। इसलिए झांसे में नहीं आएं।