दुनिया भर में हुए साइबर हमले के डर से पहले बैंक प्रभावित हुए तो अब ऑन लाइन कारोबार पर भी इसका असर नजर आने लगा है। जिले के एटीएम रेंसमवेयर वायरस के डर से जहां तीन दिन तक बंद रहे, वहीं अब ई-कामर्स कंपनियों के प्लेटफार्म पर आर्डर ही नहीं आ रहे।
साइबर एक्सपर्ट की सलाह के बाद मोबाइल और कंप्यूटर से वेबसाइट के जरिए सामान मंगवाने वालों ने भी आर्डर पर क्लिक नहीं किया। सप्ताह भर में वायरस के डर से एक चौथाई भी डिलीवरी नहीं हो पाई।
बीते रविवार सोमवार को वानाक्राई वायरस के डर से बैकिंग कामकाज पर असर पड़ा तो उसके बाद ऑन लाइन कारोबार भी लगभग बंदी पर है। साइबर एक्सपर्ट की सलाह पर युवा आर्डर करने से बच रहे हैं। दरअसल, क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड का उपयोग ऑन लाइन आर्डर में लोग इस दौरान करने से बचे। साइबर हमले के डर से लोगों ने कार्ड तक स्वैप नहीं किए।
बाजार में जिन व्यापारियों ने पीओएस मशीनें लगा रखी है, उसमे भी लोगों ने डेबिट कार्ड स्वैप कर सामान नहीं खरीदा। ऑन लाइन आर्डर से सप्लाई देने वाले विकास अग्रवाल ने बताया कि दस दिनों में उनके पास आर्डर महज 10 फीसदी ही आए हैं। हर दिन खिलौने, जूते और हैंडीक्राफ्ट के 35 से 40 आर्डर उन्हें मिल रहे थे, लेकिन अब इनकी संख्या 5 भी नहीं रही।
अमेजन, स्नैपडील, फ्लिपकार्ट, ई-बे जैसी कंपनियां अपने कुछ उत्पाद आगरा में आपूर्ति नहीं देती। इलेक्ट्रोनिक्स में कई मोबाइल और गैजेट ऑन लाइन आर्डर कर व्यापारी दिल्ली से ही मंगवाते हैं। रैंसमवेयर के डर से यह आर्डर अब नहीं हो पा रहे। व्यापारी और ग्राहक दोनों ही ऑन लाइन पेंमेंट और आर्डर से बच रहे हैं। इसी वजह से ऑन लाइन कारोबार 90 फीसदी तक घट गया।
कार्ड स्वैप करने से बच रहे ग्राहक
card swap
रेंसमवेयर के कारण पेट्रोल पंप, शोरूम और मॉल में क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड से खरीदारी करने वाले ग्राहकों ने सप्ताह में इसका प्रयोग बेहद कम किया है। पेट्रोल पंप संचालक विवेक अरोड़ा के मुताबिक कार्ड स्वैप कर खरीदारी नोटबंदी के बाद काफी बढ़ी थी, लेकिन सप्ताह भर से वायरस के डर से 20 फीसदी ग्राहक भी उपयोग नहीं कर रहे। व्यापारियों ने भी अपनी पीओएस मशीनों को बंद रखा है। उन्हें वायरस के डर से अपने एकाउंट की हैकिंग का डर सता रहा है।
प्रदेश सरकार ने 21 सितंबर 2016 को ऑन लाइन कारोबार करने वाली कंपनियों पर 5 फीसदी प्रवेश कर लगाया था। तब लखनऊ, कानपुर, गाजियाबाद, नोएडा और सहारनपुर आदि शहरों में तो कंपनियों ने रजिस्ट्रेशन कराए, लेकिन आगरा में किसी भी कंपनी ने रजिस्ट्रेशन नहीं कराया। प्रवेश कर के लिए प्रदेश सरकार ने यह प्रावधान किया था कि एकमुश्त रकम एडवांस जमा कराकर उसी में से प्रवेश कर की रकम काटी जाती है।