कब, कहां और कितनी विद्युत आपूर्ति होनी है। फॉल्ट की आशंका पर चेतावनी और फॉल्ट हो जाए तो गड़बड़ी का पता लगाना। यही नहीं छोटे फॉल्ट को ठीक भी करना। यह सब ‘कंप्यूटर जी’ करेंगे। दयालबाग शिक्षण संस्थान (डीईआई) के इलेक्ट्रीकल डिपार्टमेंट द्वारा कानपुर से आगरा के बीच बिजली के ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन के ऑनलाइन मैनेजमेंट के लिए सॉफ्टवेयर तैयार किया गया है।
डीईआई के इलेक्ट्रीकल डिपार्टमेंट में करीब 20 साल से विद्युत आपूर्ति की खामियों को दूर करने के लिए काम चल रहा है। इसमें कानपुर से आगरा के बीच बिजली के ट्रांसमिशन और इस बिजली के आगरा में डिस्ट्रीब्यूशन का लैब में नेटवर्क तैयार किया गया है।
प्रोजेक्ट डायरेक्टर प्रोफेसर डीके चतुर्वेदी ने बताया कि जनरेटर से बिजली का उत्पादन कर ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन लैब में तैयार नेटवर्क पर ऑनलाइन नियंत्रण रखने के लिए साफ्टवेयर बनाया गया है। इस साफ्टवेयर में वोल्टेज, फ्रीक्वेंसी और करंट का तारतम्य बैठाया गया है। इसमें किसी भी तरह की गड़बड़ी होने पर चेतावनी जारी हो जाती है। चेतावनी के बाद भी गड़बड़ी को ठीक न करने पर ऑटोलॉक हो जाता है। विद्युत लोड बढ़ने की जानकारी से लेकर, ऐसा होने पर उस पर नियंत्रण करने का तरीका भी सॉफ्टवेयर में है।
विद्युत वितरण का मैनेजमेंट
साफ्टवेयर से विद्युत वितरण पर ऑनलाइन नजर रखी जा सकेगी। यही नहीं संबंधित क्षेत्र में लोड बढ़ने पर ऑनलाइन मैनेजमेंट भी हो जाएगा। इसी तरह फॉल्ट होने की सटीक जगह की जानकारी मिल सकेगी। इससे फॉल्ट को सही करने में समय कम लगेगा। साथ ही लाइन लॉस को भी कम किया जा सकेगा।
छात्रों के लिए वर्चुअल पावर लैब
यह साफ्टवेयर कैसे काम करता है, बिजली का ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन कैसे होता है इस तरह की जानकारियां छात्र वर्चुअल पावर लैब (वीपीएल) से भी ले सकते हैं। डीईआई में तैयार की गई वीपीएल पर ऑनलाइन जानकारी ली जा सकती है।
भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय और पावर डिपार्टमेंट ने प्रोजेक्ट को सराहा है। इस प्रोजेक्ट के इस्तेमाल पर वार्ता चल रही है। स्थानीय स्तर पर टोरेंट पावर से भी बातचीत की जा रही है।
- प्रोफेसर डीके चतुर्वेदी, प्रोजेक्ट इंचार्ज, डीईआई