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अब मोबाइल एप से होने लगी गाय, भैंस की बिक्री

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कासगंज। सूचना प्रौद्योगिकी का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। लॉकडाउन में छूट मिलने के बाद से ऑनलाइन शॉपिंग व व्यापार को काफी बढ़ावा मिला है। इसी का नतीजा है कि अब जिले के पशुपालक अपने पशुओं की भी ऑनलाइन बिक्री कर रहे हैं। इसके लिए एनीमॉल एप का उपयोग किया जा रहा है। मार्च माह से पशु पैठ बंद होने के बाद पशु व्यापारियों व पशुपालकों को यह एक बेहतर माध्यम मिल गया है।
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जिले में बहुत से लोग पशु व्यापार से जुड़े हैं। इसके अलावा बहुत से पशुपालक पशु के दूध देना बंद करने के बाद उसे बेचकर नया पशु खरीद लेते हैं। लेकिन मार्च माह में कोरोना संक्रमण के चलते किए गए लॉकडाउन के बाद से पशु पैठ बंद पर प्रतिबंध लगा दिया गया। ऐसे में पशुपालकों को व्यापारियों को समस्या हो गई। वे ना ही अपने मवेशियों को बेच पा रहे थे ना ही खरीद पा रहे थे। ऐसे में एनीमॉल एप ने उनकी समस्या का समाधान कर दिया है। जिले के बहुत पशुपालक ऑनलाइन मवेशियों की खरीद फरोख्त कर रहे हैं।
फैक्ट फाइल
- 14 स्थानों पर लगता है पशु पैठ
- 80 से 100 गाय, भैंसों की होती है बिक्री
- 100 से 150 छोटे पशु बकरी, बकरा आदि का होता है व्यापार
जिले में पशुओं की संख्या
- 527700 महेशवंशीय पशु हैं जिले में।
- 79666 गोवंशयीय पशु हैं जिले में।
- 86550 बकरे/बकरी हैं जिले में।
- 5629 भेड़ें हैं जिले में।
- मैंने अपनी मुर्रा भैंस की बिक्री का ऑफर एप पर डाला है। 91 हजार रुपये की कीमत रखी है। ऑनलाइन अच्छे ऑफर आ रहे हैं। पशु पैठ के बंद होने के कारण भैंस की बिक्री नहीं हो पा रही थी। अब भैंस की बिक्री होने की उम्मीद बंधी है।- विजय सिंह, मोहनपुर,कासगंज।
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- मोबाइल एप पर भैंस की बिक्री का ऑफर डाला है। इच्छुक लोग लगातार फोन कर रहे हैं। उम्मीद है कि ऑनलाइन भैंस की बिक्री हो सकेगी। एप पशुपालकों के लिए अच्छा साबित होगी। कोरोना काल में इससे एक उम्मीद जगी है। - उपनेश कुमार, मुनब्बरपुर गडिय़ा, सोरों।
- ढोलना में प्रत्येक मंगलवार और बृहस्पतिवार को पैठ लगती थी। यह 19 मार्च से बंद हैं। इस कारण पशुपालकों को परेशानी हो रही है। मोबाइल एप के माध्यम से ही ईद पर बकरों की बिक्री हुई थी और अब अन्य पशु बिक रहे हैं। इससे आने वाले समय में पैठ संचालकों को घाटा हो सकता है। - डॉ. बीडी राणा, ढोलना।
- पैठ का कारोबार पूरी तरह से मार्च माह से ठप है। लॉकडाउन में पशुपालकों को भी परेशानी हुई। अब भी वे लोग पशुओं की खरीद-फरोख्त नहीं कर पा रहे हैं। इसी के चलते ऑनलाइन पशुओं की खरीद फरोख्त शुरू हो गई है। सभी व्यापार चालू हो गए हैं। पशुपैठ भी नियमानुसार चालू किए जाने चाहिए। - दिनकर राव चतुर्वेदी, फरौली।
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