कोरोना संक्रमण काल में इलाज करने वाले एसएन के चिकित्सक
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आईसीयू में मरीजों की परिजनों की तरह की सेवा : नंदकिशोर मीणा
एसएन के कोविड आईसीयू में ऑपरेशन थिएटर टैक्नीशियन नंदकिशोर मीणा संक्रमित मरीजों के ऑपरेशन में साथ रहते थे। बताया कि आइसीयू में मरीजों की परिजनों की तरह सेवा की। मरीजों को अपने हाथों से खाना भी खिलाते थे। पिनाहट की इंद्रवती को अपने हाथों से खिलाया, जब वह डिस्चार्ज हुई तो उन्होंने कहा कि डॉक्टर समेत सभी ने बेटों की तरह देखभाल की। नंदकिशोर ने बताया कि जब भी मरीज को परेशानी होती पीपीई किट पहनकर तत्काल आइसीयू में जाते थे।
लॉकडाउन में भी कैंसर मरीजों का करते रहे इलाज : डॉ. सुरभि गुप्ता
एसएन मेडिकल कॉलेज के कैंसर रोग विभाग में लॉकडाउन में भी ओपीडी बंद नहीं हुई। यहां की डॉ. सुरभि गुप्ता ने बताया कि उस वक्त संक्रमण से हाहाकार मचा हुआ था। बीमार लोगों में संक्रमण का खतरा ज्यादा था, डर भी लगता था और मरीजों के कष्ट देख दुख भी होता था। इसी हौसले से मरीजों का इलाज करते रहे। करीब चार-पांच महीने तो बच्चों और परिजनों से भी सामाजिक दूरी बरती। लेकिन मन में तसल्ली है कि महामारी में मानवता के लिए काम किया।
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महीनेभर के बच्चे को वीडियो कॉल से देख लेता था: डॉ. जीवी सिंह
एसएन के क्षय एवं वक्ष रोग के डॉ. जीवी सिंह मार्च से पांच महीने तक घर नहीं गए। जुलाई से सितंबर तक आइसोलेशन वार्ड में नाइट ड्यूटी की। दिन भी में भी मरीजों का फॉलोअप किया। दिन-रात थकान इतनी हावी हो जाती थी कि पूछो मत। कानपुर मेडिकल कॉलेज में भी संक्रमित मरीजों के इलाज को जाना पड़ा। एक महीने का शिशु था, उसको भी दुलार नहीं पा रहा था। वीडियो कॉल के जरिये ही उसे देखकर मन को खुशी मिलती। अब फिर से नाइट ड्यूटी संभाल रहा हूं।