मैनपुरी। जिले में दलहनी फसलों का कम क्षेत्रफल चिंता का विषय है। कुल फसलों के क्षेत्रफल के सापेक्ष ये महज डेढ़ प्रतिशत में दलहनी फसलों का रकबा है। ऐसे में जिले में खपत के सापेक्ष कम उत्पादन होता है। इससे एक ओर दालों की कीमत बढ़ रही है साथ ही खेतों की उर्वरा शक्ति भी कम होती जा रही है।
जिले में रबी के सीजन में दलहनी फसलों का रकबा औसतन 2100 हेक्टेयर के करीब है। खरीफ के सीजन में यह औसतन 1950 हेक्टेयर रहता है। दोनों ही सीजन में कुल क्षेत्रफल के सापेक्ष दलहनी फसलों का क्षेत्रफल महज डेढ़ प्रतिशत है। उत्पादन कम होने और खपत अधिक होने के कारण दूसरे जिलों से दालें मंगाई जाती हैं, इससे उनकी कीमत अधिक चुकानी पड़ रही है। कृषि विभाग लगातार किसानों को दलहनी फसलों के प्रति जागरूक कर रहा है, लेकिन रखवाली के चलते किसान इससे दूरी बना रहे हैं।
दो प्रकार की होती हैं दलहनी फसलें
दलहनी फसलों में कुल छह फसलें शामिल हैं। इसमें रबी के सीजन में अरहर, मूंग और उर्द शामिल हैं। खरीफ के सीजन में मसूर, मटर और चना उगाए जाते हैं।
उर्वरता बढ़ाती हैं दलहनी फसलें
खेतों की मिट्टी को उपजाऊ बनाने में भी दलहनी फसलों का विशेष योगदान है। कृषि वैज्ञानिक डॉ. जगदीश मिश्रा बताते हैं कि दलहनी फसलों की जड़ों में गांठे पाई जाती हैं। ये हवा से नाइट्रोजन को अवशोषित कर उसे मिट्टी में रोककर रखती हैं। इससे उत्पादकता बढ़ती है।
बलुई दोमट है जिले की मिट्टी
वरिष्ठ मृदा वैज्ञानिक डॉ. जगदीश मिश्रा ने बताया कि मैनपुरी की अधिकांश मिट्टी बलुई दोमट मिट्टी है। इसमें दलहनी फसलों का उत्पादन अच्छा होता है। वर्तमान में जीवांश कार्बन की मात्रा कम होने से मिट्टी उपजाऊ शक्ति कम हुई है, लेकिन वर्मी कंपोस्ट से इसे सुधारा जा सकता है।
फैक्ट फाइल
-1.50 लाख हेक्टेयर के करीब है रबी में कुल फसलों का क्षेत्रफल
-2100 हेक्टेयर के करीब है रबी में दलहनी फसलों का क्षेत्रफल
-1.32 लाख हेक्टेयर के करीब है खरीफ में कुल फसलों का क्षेत्रफल
-1950 हेक्टेयर के करीब है खरीफ में दलहनी फसलों का क्षेत्रफल
किसानों को लगातार दलहनी फसलों के उत्पादन के लिए जागरूक किया जा रहा है। बीते कुछ सालों में सुधार भी हुआ है। किसानों को दलहनी फसलों से होने वाले फायदों के बारे में समझना होगा, तभी सुधार संभव है। -डॉ. गगन दीप सिंह, जिला कृषि अधिकारी।