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आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवेः अनुमति से पहले ही चला दी गई हरियाली पर आरी

Sat, 10 Jun 2017 09:55 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला आगरा
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आगरा लखनऊ एकसप्रेस वे
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302 किमी लंबे ग्रीनफील्ड आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे में हरियाली का ख्याल ही नहीं रखा गया। 10 जिलों से होकर गुजरे एक्सप्रेसवे के निर्माण के लिए कुल 65,342 पेड़ काटे गए, लेकिन हैरतअंगेज पहलू ये है कि जनवरी 2015 में निर्माण कार्य शुरू किया गया और सभी दस जिलों के डीएफओ ने इन पेड़ों को काटने की अनुमति जून 2016 में दी। 
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एक्सप्रेसवे का लोकार्पण भी दिसंबर 2016 में कर दिया गया। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर इन पेड़ों को अनुमति मिलने से पहले ही काट दिया गया। जब तक अनुमति मिली, तब तक 60 फीसदी काम भी पूरा हो चुका था। यही नहीं, आगरा, कन्नौज और इटावा के डीएफओ ने पेड़ काटने की गोलमोल अनुमति दी, जिसमें न तो पेड़ काटने की संख्या स्पष्ट की गई और न ही संरक्षित वन भूमि।

बता दें कि आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे (ग्रीन फील्ड) के निर्माण के लिए आगरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, इटावा, औरेया, कन्नौज, कानपुर, उन्नाव और लखनऊ की 14.55 हेक्टेयर संरक्षित वन भूमि और 109.27 हेक्टेयर आरक्षित वन भूमि के गैर वानिकी प्रयोग और उसमें बाधक बन रहे 65,342 पेड़ों को काटने की अनुमति मांगी गई, लेकिन लखनऊ, उन्नाव, कानपुर, औरेया, मैनपुरी और फिरोजाबाद में कुल मिलाकर 58,581 पेड़ों को ही मंजूरी दी गई है। 
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आगरा, कन्नौज और इटावा के प्रभागीय वनाधिकारियों ने एक्सप्रेसवे के निर्माण में न तो जमीन का ब्योरा दिया और न ही पेड़ पातन की संख्या ही दी। करीब सात हजार पेड़ों का ब्योरा उपलब्ध नहीं है। आगरा के डीएफओ केके सिंह के मुताबिक आगरा में एक्सप्रेसवे में पेड़ नहीं थे। केवल घास और झाड़ियां ही थीं। एक्सप्रेस वे में काटे गए पेड़ों के एवज में पेड़ लगाने की मानिटरिंग पर्यावरण मंत्रालय करेगा। ऐसे में सवाल ये है कि इटावा और कन्नौज में सात हजार पेड़ काट दिए गए जबकि इटावा में एक्सप्रेस वे 17 किमी और कन्नौज में 80 किमी में गुजरा है।
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