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यहां तो ओटी के गेट तक पहुंच रहे कुत्ते

Tue, 23 Jun 2015 02:22 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला अागरा।
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बाह सीएचसी से नवजात का शव ले जाकर कुत्ता नोंचकर खा गया। रोंगटे खड़े कर देने वाली इस घटना से लखनऊ तक हड़कंप मचा है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या स्वास्थ्य विभाग कोई सबक सीखने को तैयार है? एसएन मेडिकल कॉलेज और जिला महिला अस्पताल का हाल देखकर तो सुधार की उम्मीद नहीं जगती। यहां तो बाह सीएचसी से ज्यादा लापरवाही नजर आती है। कुत्ते जच्चा-बच्चा वार्ड तक ही नहीं, ऑपरेशन थियेटर के गेट तक पहुंच रहे हैं। पेश है रिपोर्ट..।
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सीन -1
स्थान : एसएन मेडिकल कॉलेज
समय : सुबह 9:00 बजे
एक कुत्ता ऑपरेशन थियेटर के गेट पर बैठा है। नर्सिंग स्टाफ और डॉक्टर उसे देखकर चुपचाप गुजर जाते हैं। थोड़ी देर में कुत्ता टहलता हुआ जच्चा-बच्चा वार्ड तक पहुंच जाता है। एक बेड के नीचे जाकर लेट जाता है। पास में ही डाक्टरों का पैनल बैठा है।

सीन-2
स्थान : महिला जिला अस्पताल (लेडी लॉयल)
समय : सुबह 10:30 बजे
जच्चा-बच्चा वार्ड में कुत्ता टहल रहा है। यहां जच्चा भी हैं और नवजात शिशु भी। खतरा वैसा ही है, जैसा बाह सीएचसी में था। लेकिन कुत्ते को भगाने वाला कोई नहीं। ऐसा कोई इंतजाम नहीं जिससे आवारा जानवर अस्पताल के अंदर न आने पाएं।
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वर्जन
कुत्तों का वार्ड या ओटी गेट तक पहुंचना गंभीर बात है। इन्हें रोकने के लिए कर्मचारियों को सख्त हिदायत दी जा चुकी है। जिनकी ड्यूटी थी, उनसे जवाब तलब किया जाएगा
- डॉक्टर अजय अग्रवाल, प्राचार्य, एसएन मेडिकल कॉलेज

वर्जन
नर्सिंग स्टाफ को आवारा जानवरों को अस्पताल में आने से रोकना चाहिए। अगर ऐसा नहीं हो रहा है तो उनकी गलती है, कार्रवाई होगी।
- डॉक्टर बीना सक्सेना, प्रमुख अधीक्षक, लेडी लॉयल


वार्ड में गंदगी, गायनिग विभाग में बुरा हाल
एसएन मेडिकल कॉलेज में सफाई व्यवस्था भी चौपट मिली। गायनिक विभाग के वार्ड में गंदगी थी। कूड़ा निस्तारण में भी घोर लापरवाही दिखी। पास में ही आग लगाकर इसे नष्ट किया जा रहा था। ऐसी स्थिति में प्रसूता और नवजात रहने को मजबूर हैं।

भीषण गर्मी और पंखे खराब
एसएन में सफाई ही नहीं अन्य सुविधाएं का भी हाल बेकार है। वार्डों में पंखे खराब पड़े हैं। बेड का भी बुरा हाल है। भीषण गर्मी में नवजात को बाहर लेकर तीमारदार पंखा झालने को मजबूर हैं। मोती कटरा की रहने वाली शारदा कठेरिया की बहू भी यहीं भर्ती है। शारदा ने बताया कि वार्ड में पंखे खराब होने के कारण गर्मी से बच्चे के घमौरी निकल आई हैं।
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दवाएं तक खरीदनी पड़ती हैं...
यहां दवाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। बाहर से खरीदनी पड़ती हैं। अभी तक 15 हजार रुपये खर्च हो गए हैं।
- बिट्टू, किरावली

आपरेशन से बच्चा हुआ। दवाइयां नहीं मिलतीं। बाहर से खरीदने के लिए पर्ची थमा दी जाती है। 10 हजार रुपये अब तक खर्च हो गए हैं।
- असलम, खेरिया

आठ दिन में इलाज पर 14 हजार खर्च हो गए हैं। आपरेशन से बच्चा हुआ है, कर्ज लाकर इलाज करा रहा हूं।
- इर्शाद, फीरोजाबाद
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