आगरा। चार लाख रुपये के करीब पहुंच गई चांदी ने ग्राहकों को बाजार से दूर कर दिया है। आगरा चांदी की पायल, बिछुआ की बड़ी मंडी में शुमार है। ऐसे में यहां सराफा बाजार में चांदी के गहने, बर्तन और मूर्तियों का बाजार पूरी तरह से ठंडा है। सहालग के बाद भी बाजार में मांग बीते साल के मुकाबले महज 20 फीसदी तक ही है। जो ग्राहक आ रहे हैं, वह बेहद हल्के गहने ही पसंद करके ले जा रहे हैं। ज्यादातर ग्राहक पुरानी चांदी लाकर उसी से गहने बनवा रहे हैं, जिसमें उन्हें केवल मेकिंग चार्ज ही देना है।
चांदी की कीमतों में एक साल में आए उछाल के कारण इस साल सहालग में बाजार में सन्नाटा पसरा है। इन दिनों सहालग की खरीद के लिए जहां पुराने शहर में किनारी बाजार, नमक की मंडी, फाटक सूरजभान, शाहगंज आदि की चांदी की दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ दिखती थी, वहां अब ग्राहकों का टोटा है। इक्का दुक्का ग्राहक ही पुरानी चांदी लेकर आ रहे हैं। दरअसल, सहालग में चांदी की पायलों की मांग ज्यादा थी। 50 से 100 ग्राम के बीच पायलें खूब बिकती थीं, जिनकी पहले 6 से 7 हजार तक कीमत थी, लेकिन अब 100 ग्राम वजन की पायल की कीमत करीब 40 हजार रुपये तक आएगी। ऐसे में ग्राहक बाजार से दूर हैं। बजट बिगड़ने के कारण बेहद हल्की पायल खरीदने से भी ग्राहक कतरा रहे हैं।
- नए ग्राहक बाजार से एकदम गायब हैं। सहालग में चांदी की पायलें खूब बिकती थीं, लेकिन अब नए की खरीद एकदम कम है। पुरानी चांदी लाकर केवल मेकिंग चार्ज पर काम कराया जा रहा है।
देवेंद्र गोयल, मंत्री, श्री सराफा कमेटी-
- 80 फीसदी तक पायलों की मांग कम हो गई हैं। 100 ग्राम की पायलों की मांग ही ज्यादा थी, जो अब 40 हजार की पड़ेगी, इसलिए कारोबार न के बराबर है। कारखाने 80 फीसदी तक बंद हो चुके है
- राजू मेहरा, अध्यक्ष, सराफा स्वर्णकार व्यवसायिक कमेटी