ताजनगरी को कभी मेट्रो ट्रेन मिल पाएगी भी या नहीं इसका जवाब किसी के पास नहीं है। हां इतना जरूर है कि सरकारी खर्चे पर अफसरों का सैर-सपाटा खूब चल रहा है।
कभी दिल्ली जाते हैं तो कभी विशाखापत्तनम। अब हैदराबाद जाएंगे। इनका एक भी दौरा अभी तक फलीभूत नहीं हुआ है। अब अधिकारियों का एक दल हैदराबाद जाएगा।
विशाखापत्तनम में पीपीपी मोड की मेट्रो का अध्ययन करने के लिए भेजा गया था। इसकी डीपीआर ही सरकार ने खारिज कर दी। इससे पहले दिल्ली मेट्रो ट्रेन का अध्ययन किया गया।
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11 साल से इसी तरह के अध्ययन चल रहे हैं। ट्रेन अभी तो कागजों में ही नहीं चल पाई है, शहर में कब दौड़ेगी, कुछ कहा नहीं जा सकता है।
डीपीआर दर डीपीआर बन रही हैं। दौरे पर दौरे हो रहे हैं। नतीजा ढाक के तीन पात है। इस पर आगरा विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष राधेश्याम मिश्रा का कहना है कि प्रस्ताव को खारिज नहीं किया है।
केवल पीपीपी मोड पर मेट्रो चलाने की योजना खारिज हुई है। हैदराबाद मेट्रो के अध्ययन के बाद अब नए सिरे से प्रस्ताव तैयार किया जाएगा।
विधायक जगन प्रसाद गर्ग ने किया था विरोध
आगरा में मेट्रो चलाने की योजना की विधायक जगन प्रसाद गर्ग ने विरोध किया था। उनका कहना था कि पहला तो आगरा इतना बड़ा शहर नहीं है कि यहां मेट्रो की आवश्यकता हो।
दूसरा तर्क ये दिया था कि मेट्रो का काम कम से कम तीन से चार वर्ष तक चलेगा। इतने दिनों में शहर की जो दुर्दशा होगी, उसका जिम्मेदार कौन होगा।
विधायक का तीसरा तर्क यह था कि जाम की समस्या से मुक्ति पानी है तो उसके लिए और भी विकल्पों पर विचार किया जा सकता है।